टाइटलर ने कोर्ट में कहा है यह उनके उत्पीड़न और विच हंट(संदिग्ध व्यक्तियों की खोज) का क्लासिक मामला है, जिसमें उन्हें चार दशक से अधिक पहले किए गए कथित अपराध के लिए मुकदमे का सामना करना पड़ रहा है।
आगरा / नई दिल्ली 01 अक्टूबर ।
कांग्रेस नेता जगदीश टायलर ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान तीन व्यक्तियों की हत्या से संबंधित मामले में उनके खिलाफ हत्या के आरोप तय किए जाने को चुनौती देते हुए मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने मामले की सुनवाई की और मामले को 29 नवंबर को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। हालांकि, अदालत ने आज याचिका पर नोटिस जारी नहीं किया।

टायलर की ओर से सीनियर एडवोकेट अरविंद निगम पेश हुए। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का प्रतिनिधित्व एसपीपी अनुपम एस शर्मा और अधिवक्ता प्रकर्ष ऐरन ने किया।
अदालत ने निगम से मामले में गवाहों के बयान रिकॉर्ड पर रखने को कहा।
टाइटलर ने 30 अगस्त को पारित ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी, जिसके तहत उनके खिलाफ हत्या और गैरकानूनी तरीके से एकत्र होने, दंगा करने और दुश्मनी को बढ़ावा देने सहित अन्य अपराधों के लिए आरोप तय किए गए। टाइटलर ने इन आरोपों में खुद को निर्दोष बताया है।
जस्टिस नानावती आयोग की सिफारिश के आधार पर केंद्र सरकार ने सीबीआई को टाइटलर और कई अन्य के खिलाफ मामलों की फिर से जांच करने का निर्देश दिया था।
तदनुसार, सीबीआई ने नवंबर 2005 में फिर से एफआईआर दर्ज की थी। हालांकि सीबीआई द्वारा चार्जशीट में उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की सिफारिश नहीं की गई थी। बाद में पिछले साल मई में उनके खिलाफ पूरक चार्जशीट दायर की गई।
अपनी याचिका में टायलर ने तर्क दिया कि आरोपित आदेश विकृत, अवैध है और ट्रायल कोर्ट द्वारा विवेक का उपयोग नहीं किया गया।
उन्होंने प्रस्तुत किया कि वर्तमान मामला टाइटलर के उत्पीड़न और विच हंट(संदिग्ध व्यक्तियों की खोज) का क्लासिक मामला है, जिसमें उन्हें चार दशक से अधिक पहले किए गए कथित अपराध के लिए मुकदमे का सामना करना पड़ रहा है।

याचिका में कहा गया,
“फिलहाल याचिकाकर्ता के अलावा किसी अन्य आरोपी का नाम नहीं लिया गया। याचिकाकर्ता के पक्ष में पूरक समापन रिपोर्ट दाखिल करने के बाद सीबीआई अब उन गवाहों के बयानों पर भरोसा करना चाह रही है, जिन्होंने पहले जो बयान दिए हैं, वे तीसरे पूरक आरोपपत्र में दिए गए बयानों के विपरीत हैं, जिसमें याचिकाकर्ता को बुलाया गया।”
कहा गया कि टायलर के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि करने के लिए कोई विश्वसनीय सबूत नहीं है।
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इस प्रकार, उसके खिलाफ आरोप तय करने का आदेश यंत्रवत् और बिना सोचे-समझे पारित किया गया।
केस टाइटल: जगदीश टायलर बनाम सीबीआई और अन्य।
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साभार: लाइव लॉ
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