आगरा:
दुराचार, अप्राकृतिक कृत्य और अन्य धाराओं के आरोपों से घिरे आरोपी हिमांशू रावत को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-23) माननीय अमित कुमार यादव ने साक्ष्य के अभाव में बरी करने का आदेश दिया है।
अदालत ने पीड़िता (वादनी) के बयानों में भारी विरोधाभास पाए जाने के कारण यह निर्णय लिया।
मामला थाना सदर बाजार में दर्ज हुआ था। वादनी का आरोप था कि उसके ताऊ की लड़की का बेटा, आरोपी हिमांशू रावत (निवासी नैनाना जाट, रावत पैलेस, ग्वालियर रोड), उसके मर्चेंट नेवी में कार्यरत पति से दोस्ती होने के कारण उनके घर आता-जाता था।
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वादनी ने आरोप लगाया कि हिमांशू ने उसे अकेला पाकर उसके साथ दुराचार किया, जिसकी रिपोर्ट 1 जुलाई 2022 को थाना मलपुरा में दर्ज हुई थी। इस मामले में आरोपी जेल भी गया था।
बयानों में विरोधाभास और पूर्व में बरी कराना:
* पहले मामले के बाद, पति द्वारा दूरी बना लेने पर वादनी अपने बच्चों के साथ किराये के मकान में रहने लगी।
* वादनी का आरोप था कि जमानत पर रिहा होने के बाद, आरोपी हिमांशू रावत, उसके पिता, दादा, चाचा और भाई ने उसके घर आकर माफी मांगी और मुकदमा समाप्त कराने पर दोनों की शादी कराने का वायदा किया।
* इस वादे पर, वादनी ने पूर्व में आरोपी के पक्ष में बयान देकर उसे बरी करा दिया था (मुकदमा समाप्त करा दिया)।
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* वादनी के अनुसार, मुकदमा खत्म होने के बाद आरोपी हिमांशू ने शादी जल्द होने की बात कहकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और अप्राकृतिक कृत्य भी किया।
* इसके बाद, जब आरोपी ने किसी अन्य युवती से शादी कर ली, तब वादनी ने यह वर्तमान मुकदमा दर्ज कराया।
अदालत में सुनवाई के दौरान, वादनी के बयानों में कई गंभीर विरोधाभास पाए गए।
आरोपी हिमांशू रावत की ओर से पैरवी अधिवक्ता शिव शंकर शर्मा ने की, जिनके तर्कों और साक्ष्य के अभाव को देखते हुए एडीजे-23 ने आरोपी को बरी करने का आदेश दिया।
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