आगरा।
जलकल विभाग के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी द्वारा पेंशन संशोधन के नाम पर अवैध धन की मांग करने और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए विभाग के उच्चाधिकारियों के विरुद्ध न्यायालय की शरण ली गई है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) माननीय मृत्युंजय श्रीवास्तव ने इस मामले में सुनवाई हेतु 30 मार्च की तिथि निर्धारित की है।
मामला क्या है ?
प्रार्थी राजवीर सिंह (पुत्र राम चरन), निवासी मोतिया की बगीची, थाना हरीपर्वत, ने अधिवक्ता राजकुमार कुशवाह के माध्यम से धारा 156(3) CrPC के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया है।
आरोप निम्नलिखित अधिकारियों के विरुद्ध है:
* अरुणेन्द्र राजपूत (महाप्रबंधक, जलकल विभाग)
* ब्रजेश सिंह (मुख्य वित्त लेखाधिकारी, नगर निगम)
* गुलशन राज (सहायक लेखाकार, जलकल विभाग)
* ऋषिकेश (लेखा परीक्षक, नगर निगम)
मुख्य आरोप: सेवा इतिहास में विसंगति और रिश्वत की मांग:
प्रार्थी का पक्ष है कि उसकी प्रथम नियुक्ति 22 मई 1985 को खलासी के पद पर हुई थी। बाद में 12 जुलाई 1989 को उसे क्लोरीन मैकेनिक के पद पर पदोन्नत किया गया।

विवाद तब शुरू हुआ जब:
* गलत वेतन निर्धारण: विभाग ने प्रार्थी की नियुक्ति तिथि 22 मई 1985 के स्थान पर 18 दिसंबर 1990 मानकर वेतनमान निर्धारित कर दिया, जो शासनादेश के विरुद्ध है।
* पेंशन में भेदभाव: प्रार्थी का आरोप है कि उसी के साथ नियुक्त हुए अन्य कर्मचारी को उससे अधिक पेंशन मिल रही है, जबकि प्रार्थी का वेतन निर्धारण गलत होने के कारण उसे आर्थिक हानि हो रही है।
* अवैध धन की मांग: जब प्रार्थी ने इस विसंगति को सुधारने हेतु अधिकारियों से संपर्क किया, तो आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कार्य करने के बदले अवैध धनराशि (रिश्वत) की मांग की।
न्यायालय का रुख:
प्रार्थी ने पूर्व में पुलिस में भी शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्यवाही न होने पर अंततः न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया है और अगली सुनवाई के लिए 30 मार्च का दिन नियत किया है।
विशेष नोट: यह समाचार प्रार्थी द्वारा न्यायालय में दिए गए तथ्यों पर आधारित है।
मामले की सत्यता न्यायालय के आगामी आदेशों पर निर्भर करेगी।
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