आगरा ।
आगरा के थाना ताजगंज क्षेत्र के अंतर्गत नगला कली में वर्ष 2009 में हुए जानलेवा हमले के मामले में न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया है।
एडीजे कोर्ट संख्या 15 के न्यायाधीश माननीय राजीव कुमार पालीवाल ने तीन सगे भाइयों मदन मोहन, ब्रज मोहन और राम मोहन को दोषी पाते हुए सात-सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषियों पर कुल 78 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
अभियोजन की कहानी के अनुसार, यह विवाद 2 अक्टूबर 2009 की सुबह शुरू हुआ था। वादी रिंकू ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसका भाई टिंकू जब जोगिंग करके घर लौटा, तभी पूर्व रंजिश के कारण आरोपी मदन मोहन, ब्रज मोहन, राम मोहन, जगदीश और उमेश ने लाठी, डंडे, हॉकी और तमंचों से लैस होकर उनके घर पर हमला कर दिया।
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आरोपियों ने न केवल मारपीट की, बल्कि रस्से से गला दबाकर जान से मारने का प्रयास किया और दहशत फैलाने के लिए फायरिंग भी की। इस हमले में वादी, उसका भाई और उनके बुजुर्ग दादा-दादी गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
मुकदमे की कार्यवाही के दौरान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता योगेश बघेल ने न्यायालय के समक्ष वादी सहित कुल नौ गवाह पेश किए। अदालत ने गवाहों के बयानों, मेडिकल रिपोर्ट और अभियोजन के तर्कों को स्वीकार करते हुए तीनों भाइयों को जानलेवा हमले का दोषी माना।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में कुल पांच भाइयों के विरुद्ध नामजद मुकदमा दर्ज किया गया था। विचारण के दौरान दो आरोपी भाइयों, जगदीश और उमेश की मृत्यु हो गई थी, जिसके कारण न्यायालय ने उनके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही पहले ही समाप्त कर दी थी। अब शेष तीन जीवित आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।
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