बैंक की लापरवाही पर आगरा उपभोक्ता आयोग प्रथम सख्त: खाते का विवरण न देने पर लगाया 10,000/- रुपये का हर्जाना

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आगरा:

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम आगरा के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने बैंक द्वारा ऋण खाते का विवरण (स्टेटमेंट) उपलब्ध न कराने को ‘सेवा में कमी’ मानते हुए उपभोक्ता के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

आयोग ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (पूर्ववर्ती आंध्रा बैंक) को आदेश दिया है कि वह 45 दिनों के भीतर उपभोक्ता को उसके ऋण खाते का पूरा लेखा-जोखा और बकाया न होने की स्थिति में ‘अदेयता प्रमाण पत्र’ (NOC) प्रदान करे।

जानिए क्या था मामला ?

परिवादी प्रमोद कुमार खनूजा ने प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत मयूरी ई-रिक्शा खरीदने के लिए फरवरी 2016 में आंध्रा बैंक (अब यूनियन बैंक) से 77,000/- रुपये का ऋण लिया था ।

बैंक ने 1,704/- रुपये की मासिक किस्त तय की थी। परिवादी का आरोप था कि उन्होंने 2 साल 8 महीने तक नियमित किस्तें चुकाईं, फिर भी बैंक ने गलत तरीके से रिकवरी नोटिस (RC) जारी कर दिया।

इस दौरान परिवादी ने तहसील में 35,000/- रुपये जमा भी किए, लेकिन बार-बार मांगने के बावजूद बैंक ने उन्हें ऋण खाते का स्टेटमेंट उपलब्ध नहीं कराया।

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आयोग की टिप्पणियां:

सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने पाया कि:

* बैंक ने निर्धारित किस्त (1,704/- रुपये) के बजाय अलग-अलग तिथियों पर मनमानी ढंग से कटौती की, जो सेवा में कमी है।

* बैंक द्वारा प्रस्तुत ऋण विवरण अद्यतन (Updated) नहीं था और न ही ब्याज गणना का कोई स्पष्ट आधार पेश किया गया।

* उपभोक्ता द्वारा बार-बार मांगने पर भी स्टेटमेंट न देना बैंक की कार्यप्रणाली में बड़ी चूक है।

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आयोग का आदेश:

आयोग ने परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए बैंक को निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:

* 45 दिनों के भीतर ऋण खाते का पूरा विवरण परिवादी को उपलब्ध कराया जाए।

* यदि ऋण चुकता हो चुका है, तो निर्धारित समय सीमा में NOC (No Dues Certificate) जारी की जाए।

* यदि बैंक इस अवधि में आदेश का पालन करने में विफल रहता है, तो उसे परिवादी को मानसिक पीड़ा और वाद व्यय के रूप में 10,000/- रुपये का भुगतान करना होगा।

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विवेक कुमार जैन
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