आगरा/नई दिल्ली:
दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में कांस्टेबल (GD) पद के लिए एक उम्मीदवार की अयोग्यता को रद्द करते हुए, चिकित्सा मानकों की एक प्रगतिशील व्याख्या पेश की है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि शरीर में किसी भी प्रकार की विकृति तब तक अयोग्यता का आधार नहीं होनी चाहिए, जब तक कि वह उम्मीदवार के कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा न बने।
मामले की पृष्ठभूमि:
अजय कुमार नामक उम्मीदवार ने CAPF में कांस्टेबल पद के लिए आवेदन किया था और प्रारंभिक चयन परीक्षाओं को सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर लिया था।
हालांकि, नवंबर 2025 में आयोजित ‘विस्तृत चिकित्सा परीक्षा’ (DME) और बाद में ‘समीक्षा चिकित्सा बोर्ड’ (RME) ने उन्हें ब्रैकीमेटाटार्सिया (दाएं पैर की चौथी उंगली का असामान्य रूप से छोटा होना) के कारण अनफिट घोषित कर दिया था।

न्यायालय का तर्क और ‘ज्योति पंवार’ मामले का संदर्भ:
न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि यह मामला हाल ही में तय किए गए ‘ज्योति पंवार बनाम भारत संघ’ मामले के समान है।
न्यायालय ने भर्ती के “यूनिफॉर्म गाइडलाइंस” (MET) का हवाला देते हुए निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदु रखे:
* कार्यात्मक बाधा अनिवार्य: पैर की उंगलियों की विकृति केवल तब अयोग्यता का कारण बनेगी जब वह जूते पहनने में बाधा डाले या चलने, दौड़ने, मार्च करने या कूदने की क्षमता को प्रभावित करे।
* अधूरी जांच: न्यायालय ने पाया कि मेडिकल बोर्ड ने इस बात पर कोई स्पष्ट राय नहीं दी थी कि क्या अजय कुमार की स्थिति वास्तव में उनके काम करने की क्षमता को सीमित करती है ?
“दिशानिर्देशों के अनुसार, पैर की उंगलियों की विकृति हर मामले में अयोग्यता नहीं है। मेडिकल बोर्ड को यह देखना चाहिए कि क्या यह विकृति शारीरिक सक्रियता या ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा करने में हस्तक्षेप करती है ? “
हाईकोर्ट का अंतिम आदेश:
उच्च न्यायालय ने पूर्व के मेडिकल बोर्डों के निर्णयों को रद्द करते हुए अजय कुमार को आर्मी अस्पताल (R&R) द्वारा गठित एक नए मेडिकल बोर्ड के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है।
* पुनः परीक्षण: उम्मीदवार को 23 दिसंबर 2025 को सुबह 11 बजे सेना के रिसर्च एंड रेफरल (R&R) अस्पताल में उपस्थित होना होगा।
* विशेषज्ञ की राय: यदि आवश्यक हो, तो एक विशेषज्ञ डॉक्टर उम्मीदवार की स्थिति की जांच करेगा और यह निर्धारित करेगा कि क्या वह ड्यूटी के लिए फिट है ।
* अंतिम निर्णय: उम्मीदवार ने सहमति जताई है कि वह आर्मी अस्पताल के अंतिम निर्णय को स्वीकार करेगा।
दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला उन हजारों उम्मीदवारों के लिए एक उम्मीद की किरण है जो मामूली शारीरिक भिन्नताओं के कारण तकनीकी आधार पर अयोग्य घोषित कर दिए जाते हैं।
यह निर्णय स्पष्ट करता है कि सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए ‘चिकित्सा फिटनेस’ का मूल्यांकन केवल दिखावट के बजाय उम्मीदवार की ‘कार्यक्षमता’ पर आधारित होना चाहिए।
अपील कर्ता अजय कुमार की तरफ़ से हाईकोर्ट में प्रभावी पैरवी अधिवक्ता के.के. शर्मा, समीर ख़ान, हर्षित अग्रवाल, प्रथम किंद्रा द्वारा की गई ।
Attachment/Order/Judgement – CHS16122025CW189022025_153934
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