एटीएम से अवैध निकासी पर आगरा उपभोक्ता आयोग प्रथम का सख्त रुख, बैंक को हर्जाना भरने का दिया निर्देश

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आगरा ।

आगरा के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम ने बैंक खाते से हुई अवैध निकासी के एक मामले में सेवा में कमी पाते हुए विपक्षी बैंकों के विरुद्ध महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है।

आयोग ने बैंकों को आदेश दिया है कि वे परिवादी को उसके खाते से अवैध रूप से निकाली गई अस्सी हजार रुपये की धनराशि ब्याज सहित वापस करें।

यह मामला हाथरस निवासी लव कुमार से संबंधित है, जो घटना के समय वायुसेना में कारगिल क्षेत्र में तैनात थे। परिवादी के अनुसार, उन्होंने अपना एटीएम कार्ड घरेलू खर्चों के लिए अपनी पत्नी जयरानी को दिया था।

दिसंबर 2019 में जब उनकी पत्नी आगरा स्थित एक एटीएम से पैसे निकालने गईं, तो वहां से कोई धनराशि प्राप्त नहीं हुई।

इसके बाद परिवादी को ज्ञात हुआ कि उनके खाते से अज्ञात व्यक्तियों द्वारा अलग-अलग समय में कुल अस्सी हजार रुपये की अवैध निकासी की गई है।

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परिवादी ने इस संबंध में बैंक के टोल फ्री नंबर और स्थानीय शाखा को तुरंत सूचित किया था। शिकायत के बावजूद बैंक द्वारा खाता लॉक करने या समस्या का समाधान करने में कोई तत्परता नहीं दिखाई गई। इसके विपरीत, बैंक ने विधिक नोटिस का उत्तर देते हुए अपनी जिम्मेदारी से इनकार कर दिया।

मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि विपक्षी बैंकों की ओर से कोई भी ठोस पक्ष या बहस प्रस्तुत नहीं की गई। आयोग ने साक्ष्यों का परिशीलन करते हुए माना कि परिवादी एक उपभोक्ता है और बैंक उसकी सेवा प्रदाता है।

आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि अनधिकृत और धोखाधड़ी वाले लेनदेन को रोकने के लिए बैंकों को सतर्क रहना चाहिए और तकनीकी रूप से सक्षम होना चाहिए।

आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने अपने निर्णय में कहा कि परिवादी की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई न करना सेवा में स्पष्ट कमी है।

आयोग ने विपक्षी बैंकों को संयुक्त और पृथक रूप से आदेशित किया कि वे अवैध निकासी की तिथि 26 दिसंबर 2019 से भुगतान की तिथि तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अस्सी हजार रुपये की धनराशि आयोग के खाते में जमा करें।

इसके साथ ही, परिवादी को हुई मानसिक पीड़ा के लिए दस हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये की अतिरिक्त राशि देने का भी आदेश दिया गया है।

यदि बैंक नियत समय सीमा (45 दिन) के भीतर भुगतान करने में विफल रहते हैं, तो ब्याज दर को बढ़ाकर नौ प्रतिशत कर दिया जाएगा।

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विवेक कुमार जैन
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