आगरा।
चेक बाउंस (Check Dishonour) के एक पुराने मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी को कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई है।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM-12) माननीय अनुभव सिंह ने दयालबाग निवासी मलखान सिंह को दोषी करार देते हुए 6 माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, अदालत ने आरोपी पर 3 लाख 60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
जुर्माने की राशि का वितरण:
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि कुल जुर्माना राशि में से:
* 3 लाख 50 हजार रुपये: पीड़ित (वादी) रमेश चंद को बतौर मुआवजा (प्रतिकर) दिए जाएंगे।
* 10 हजार रुपये: राज्य सरकार के राजकोष में जमा किए जाएंगे।
क्या था पूरा मामला ?
मामले के अनुसार, नगला पदी (न्यू आगरा) निवासी वादी रमेश चंद और आरोपी मलखान सिंह के बीच पारिवारिक और मित्रता के संबंध थे। आरोपी ने अपनी व्यापारिक जरूरतों का हवाला देते हुए रमेश चंद से 3 लाख रुपये उधार लिए थे।

जब भुगतान का समय आया, तो आरोपी ने 17 सितंबर 2018 को तीन लाख रुपये का एक चेक वादी को सौंपा। रमेश चंद ने जब इस चेक को बैंक में लगाया, तो वह ‘डिसऑनर’ (बाउंस) हो गया।
कानूनी प्रक्रिया और फैसला:
चेक बाउंस होने के बाद वादी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से आरोपी को विधिक नोटिस भेजा, लेकिन कोई सकारात्मक जवाब या भुगतान न मिलने पर न्यायालय में मुकदमा दायर किया गया।
अदालत का निष्कर्ष:
“पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने माना कि आरोपी ने जानते हुए भी भुगतान नहीं किया। एनआई एक्ट (NI Act) के तहत यह एक दंडनीय अपराध है।”
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय अनुभव सिंह ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी मलखान सिंह को दोषी पाया और सजा का ऐलान किया।
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