आगरा।
दहेज उत्पीड़न, मारपीट और पत्नी के साथ गंभीर आपराधिक कृत्यों के आरोपों से घिरे एक मामले में जिला न्यायालय ने आरोपी पति को राहत प्रदान की है।
जिला जज ने जंगजीत नगर (थाना सदर) निवासी सुमित को अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) देते हुए उसकी रिहाई के आदेश जारी किए हैं।
क्या था मामला ?
थाना ताजगंज में वादिनी मधु सिंह ने अपने पति सुमित परिहार और ननद के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था।
वादिनी के प्रमुख आरोप थे कि:
* उनकी शादी 10 मई 2024 को हुई थी, जिसके बाद से ही पति और ननद 2 लाख रुपये की अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित करते थे।
* पति काम पर जाते समय उसे घर में ताला बंद कर देता था।
* पति ने उसके साथ जबरन दुराचार (Unnatural offense/Abuse) किया और उसके अश्लील वीडियो बनाकर वायरल करने की धमकी दी।
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बचाव पक्ष के तर्क और न्यायालय का फैसला:
सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता झम्मन सिंह ने न्यायालय के समक्ष मजबूती से पक्ष रखा।
बचाव पक्ष की मुख्य दलीलें निम्नलिखित थीं:
* मेडिकल रिपोर्ट का अभाव: पीड़िता द्वारा लगाए गए गंभीर शारीरिक शोषण और मारपीट के आरोपों की पुष्टि के लिए कोई भी चिकित्सकीय साक्ष्य (Medical Evidence) पत्रावली पर मौजूद नहीं था।
* झूठा फंसाने का दावा: अधिवक्ता ने आरोपों को निराधार बताते हुए जमानत की गुहार लगाई।
न्यायालय का रुख:
जिला जज ने आरोपी के अधिवक्ता के तर्कों को गंभीरता से लिया। न्यायालय ने पाया कि पीड़िता की ओर से कोई मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है, जो आरोपों की गंभीरता को प्रमाणित कर सके।
साक्ष्यों के अभाव और परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालय ने सुमित पुत्र स्वर्गीय राजेंद्र सिंह का अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया।
कानूनी टिप्पणी:
अग्रिम जमानत देते समय न्यायालय अक्सर आरोपों की प्रकृति और उपलब्ध भौतिक साक्ष्यों (जैसे मेडिकल रिपोर्ट) के संतुलन को देखता है।
इस मामले में मेडिकल रिपोर्ट का न होना आरोपी के पक्ष में एक मजबूत आधार बना।
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