आगरा।
न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (न्यायालय संख्या-01, आगरा) की मजिस्ट्रेट माननीय विनीता सिंह-1 ने एक मामले की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण विधिक व्यवस्था दी है।
न्यायालय ने कहा कि यदि किसी विवाद या घटना के संबंध में एक पक्ष की ओर से पहले से ही मुकदमा दर्ज है और स्थिति क्रॉस वर्जन यानी परस्पर विरोधी दावों की है, तो मात्र इस आधार पर दूसरे पक्ष द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों की उपेक्षा नहीं की जा सकती।
अदालत ने मामले को प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध मानते हुए पुलिस को केस दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है।
यह मामला आगरा के थाना जगदीशपुरा क्षेत्र से जुड़ा है। प्रार्थिया श्रीमती मीना देवी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 173(4) के तहत अदालत में गुहार लगाई थी।
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उनका आरोप था कि उन्होंने वर्ष 2007 में नई आबादी रामनगर में एक मकान खरीदा था, जिसमें वे अपने परिवार के साथ रह रही हैं। आरोप के अनुसार, विपक्षी पप्पू ने आपराधिक षड्यंत्र रचकर उसी संपत्ति का एक अन्य इकरारनामा वर्ष 2018 में श्रीमती तुलसा के पक्ष में कर दिया।
इसके अलावा प्रार्थिया ने आरोप लगाया कि विपक्षीगण ने उनके घर में जबरन घुसकर मारपीट की, गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी।
न्यायालय द्वारा मांगी गई आख्या में थाना जगदीशपुरा पुलिस ने बताया कि संबंधित संपत्ति को लेकर दोनों पक्षों में विवाद है।
पुलिस के अनुसार, विपक्षी पक्ष की तहरीर पर इस घटना के संबंध में पहले ही 18 अप्रैल 2026 को मुकदमा अपराध संख्या 262/2026 धारा 318(4)/338/61(2) बीएनएस के तहत पंजीकृत किया जा चुका है और विवेचना जारी है। पुलिस ने प्रार्थिया के आरोपों को असत्य और निराधार बताया था।
पत्रावली और पुलिस आख्या का परिशीलन करने के बाद मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि विपक्षी पक्ष द्वारा पहले ही रिपोर्ट दर्ज कराए जाने के कारण यह स्थिति स्पष्ट तौर पर क्रॉस वर्जन की श्रेणी में आती है।
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अदालत ने कहा कि प्रार्थनापत्र में धोखाधड़ी, जालसाजी, मारपीट और घर में अतिक्रमण जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनकी सत्यता का पता केवल एक निष्पक्ष और स्वतंत्र विवेचना के जरिए ही लगाया जा सकता है। मात्र विपक्षी की एफआईआर पहले दर्ज होने से प्रार्थिया के दावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
न्यायालय ने प्रार्थिया मीना देवी के प्रार्थनापत्र को स्वीकार करते हुए जगदीशपुरा के थाना प्रभारी को आदेश दिया है कि वे सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें।वादी की तरफ़ से प्रभावी पैरवी अधिवक्ता नरेश पारस द्वारा की गई ।
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