आगरा।
जनपद न्यायालय के एडीजे-4 माननीय ज्ञानेंद्र राव ने दहेज हत्या के एक बहुचर्चित मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी पति और सास को दोषमुक्त (बरी) कर दिया है।
न्यायालय ने यह आदेश गवाहों के बयानों में पाए गए गंभीर विरोधाभासों और बचाव पक्ष की दलीलों के आधार पर दिया।
मामले का विवरण:
यह मामला थाना जगदीशपुरा में विशंभर दयाल (निवासी रानी बाग, नई दिल्ली) द्वारा दर्ज कराया गया था। वादी के अनुसार, उनकी पुत्री भावना का विवाह 6 नवंबर 2017 को विपुल (निवासी मारुति स्टेट, बोदला रोड) के साथ हुआ था।
आरोप था कि:
* शादी में 18-20 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद ससुराल पक्ष संतुष्ट नहीं था।
* पति विपुल, सास राधा, जेठ पुलकित और जिठानी सरिता अतिरिक्त 5 लाख रुपये की मांग को लेकर भावना को प्रताड़ित करते थे।
* मांग पूरी न होने पर 21 फरवरी 2018 को भावना की फांसी लगाकर हत्या कर दी गई।
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न्यायालय का निर्णय और विधिक तर्क:
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने वादी और उनकी पत्नी सहित कुल सात गवाह पेश किए। हालांकि, बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद शर्मा एवं मनीष पाठक ने न्यायालय के समक्ष तर्क रखा कि:
* बयानों में विरोधाभास: अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों में घटनाक्रम और समय को लेकर गंभीर विसंगतियां थीं।
* साक्ष्यों की कमी: आरोपियों के खिलाफ दहेज के लिए प्रताड़ित करने या हत्या में संलिप्तता के ठोस और निर्विवाद साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
अदालत ने बचाव पक्ष के तर्कों से सहमत होते हुए माना कि संदेह का लाभ (Benefit of Doubt) आरोपियों को मिलना चाहिए।
इसी आधार पर पति विपुल और सास श्रीमती राधा को सभी आरोपों से बरी करने का आदेश जारी किया गया।
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प्रमुख बिंदु (Key Highlights):
* न्यायालय: एडीजे-4 माननीय ज्ञानेंद्र राव।
* बचाव पक्ष के अधिवक्ता: अरविंद शर्मा एवं मनीष पाठक।
* बरी होने वाले: विपुल (पति) और श्रीमती राधा (सास)।
* बरी होने का मुख्य कारण: गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास।
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