आगरा।
दहेज हत्या जैसे गंभीर मामले में अपनी ही पुत्री के न्याय के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने वाली मां और परिजनों के न्यायालय में मुकर जाने पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है।
साक्ष्यों के अभाव में आरोपी पति को बरी करते हुए एडीजे 14 माननीय ज्योत्स्ना सिंह ने झूठी गवाही देने और न्यायालय को गुमराह करने के आरोप में मृतका की मां के विरुद्ध विधिक कार्यवाही करने के आदेश दिए हैं।
मामला थाना कागारोल के ग्राम अकोला का है। अभियोजन के अनुसार, श्रीमती रामा देवी ने तहरीर दी थी कि उनकी पुत्री रिंकी का विवाह 13 मई 2023 को राजकुमार के साथ हुआ था।
आरोप था कि शादी के बाद से ही पति राजकुमार, सास कैला देवी, ननद संजू और जेठ बबलू दहेज में खेत, स्कूटी और दो लाख रुपये की मांग को लेकर रिंकी को प्रताड़ित कर रहे थे।
Also Read – छह लाख पांच हजार रुपये की राशि के चेक बाउंस मामले में आरोपी पति-पत्नी अदालत में तलब

मांग पूरी न होने पर 6 अक्टूबर 2024 को रिंकी की फांसी लगाकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपी पति के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया था।
मामले की सुनवाई के दौरान उस समय नया मोड़ आया जब वादिनी रामा देवी (मृतका की मां), बहन पिंकी और बहनोई सुनील कुमार सहित सात गवाह अदालत में पेश हुए।
अपनी ही दी गई तहरीर के विपरीत, रामा देवी ने अदालत में बयान दिया कि उनकी पुत्री रिंकी अक्सर अवसाद में रहती थी और मरने की बातें करती थी।
उन्होंने ससुराल पक्ष द्वारा दहेज की मांग और उत्पीड़न के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि रिंकी ने स्वयं आत्महत्या की थी। मृतका की बहन और बहनोई भी अपने पूर्व कथनों से मुकर गए।
अदालत ने गवाहों के मुकर जाने और आरोपी के अधिवक्ता अशोक कुमार कुशवाह के तर्कों को सुनने के बाद साक्ष्य के अभाव में आरोपी राजकुमार को बरी कर दिया।
हालांकि, न्यायालय ने न्याय प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ करने को गंभीरता से लेते हुए वादिनी श्रीमती रामा देवी के विरुद्ध गवाही से पलटने और न्यायालय का समय बर्बाद करने के लिए कानूनी कार्यवाही शुरू करने का आदेश जारी किया है।
Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp – Group Bulletin & Channel Bulletin




