आगरा:
किसानों के अपमान और राजद्रोह के मामले में घिरीं भाजपा सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
आगरा की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट माननीय अनुज कुमार सिंह की अदालत ने मामले में बार-बार टल रही बहस और अधिवक्ता की अनुपस्थिति पर कड़ा रुख अपनाया है।
क्या है पूरा मामला ?
कंगना रनौत के खिलाफ किसानों के प्रति कथित अपमानजनक टिप्पणी और राजद्रोह के मामले में आज कोर्ट में महत्वपूर्ण बहस होनी थी।
हालांकि, कंगना की सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता अनसूया चौधरी स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए आज भी अदालत में पेश नहीं हुईं।
उनकी ओर से जूनियर अधिवक्ता सुधा प्रधान और स्थानीय अधिवक्ता विवेक शर्मा ने प्रार्थना पत्र देकर अगली तारीख की मांग की।
वादी पक्ष का तीव्र विरोध:
इस पर वादी रमाशंकर शर्मा और उनके अधिवक्ताओं (सुखबीर सिंह चौहान व राजवीर सिंह) ने कड़ी आपत्ति जताई।
उन्होंने दलील दी कि:
* पिछले तीन तारीखों से बीमारी का बहाना बनाकर मामले को लटकाया जा रहा है।

* विपक्षी अधिवक्ता जानबूझकर कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रही हैं।
* विपक्षी का बहस करने का अवसर अब समाप्त कर दिया जाना चाहिए।
कोर्ट का फैसला: जुर्माना और अंतिम अवसर
दोनों पक्षों को सुनने के बाद, कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कंगना रनौत पर ₹500/- का जुर्माना लगाया है।
अदालत ने बचाव पक्ष को चेतावनी देते हुए बहस के लिए 3 अप्रैल 2026 की तिथि नियत की है और इसे अंतिम अवसर करार दिया है।
महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु: सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता दुर्ग विजय सिंह भैया ने सुप्रीम कोर्ट की एक रूलिंग पेश की।
इसमें स्पष्ट किया गया है कि कोई भी अधिवक्ता पैरवी तो कर सकता है, लेकिन उसे वादकारी (Petitioner) का बयान दर्ज कराने का अधिकार नहीं है।
कोर्ट ने इस रूलिंग को रिकॉर्ड पर ले लिया है।
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