आगरा।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) माननीय मृत्युंजय श्रीवास्तव के स्पष्ट आदेश के बावजूद, थाना सिकंदरा के थानाध्यक्ष द्वारा मुकदमा दर्ज न किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित प्रार्थी ने अब सीजेएम अदालत से थानाध्यक्ष को तलब (समन) करने का आग्रह किया है।
क्या है मामला ?
सीजेएम मृत्युंजय श्रीवास्तव ने 30 अक्टूबर को एक पीड़ित के प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए, उसमें वर्णित आरोपों के तहत मुकदमा दर्ज करने और विवेचना शुरू करने का आदेश थानाध्यक्ष सिकंदरा को दिया था।
* शिकायतकर्ता: प्रार्थी राजेश मुदगल पुत्र ओमप्रकाश मुदगल, निवासी ग्राम ककरैठा, थाना सिकंदरा।
* आरोपी: गांव के शंकर लाल, गौरव, सौरभ, एवं पदम् लाल।
* आरोप: प्रार्थी ने अपने अधिवक्ता योगेश शुक्ला के माध्यम से आरोप लगाया था कि 3 अक्टूबर 2025 की शाम 4 बजे के करीब, विपक्षीगण एक राय होकर लाठी-डंडों के साथ उसके घर में घुस आए, गाली-गलौज की और प्रार्थी व उसकी पत्नी के साथ मारपीट की।
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विरोध करने पर, प्रार्थी को पेट में लात मारकर गिरा दिया गया और आरोपी गौरव ने कथित तौर पर बदनीयती से पत्नी के ऊपर बैठकर उनका ब्लाउज फाड़ दिया।
* विरोध: पत्नी के रोने-चीखने की आवाज सुनकर मौके पर आए गांव वालों को देखकर विपक्षीगण धमकी देकर भाग गए थे।
थानाध्यक्ष पर अनुपालन न करने का आरोप
प्रार्थी राजेश मुदगल ने पुनः अपने अधिवक्ता योगेश शुक्ला के माध्यम से अदालत में एक और प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया है। इसमें कहा गया है कि सीजेएम के आदेश के बावजूद, 12 नवंबर तक थानाध्यक्ष सिकंदरा ने मुकदमा दर्ज नहीं किया है।
प्रार्थी ने सीजेएम से आग्रह किया है कि अदालत द्वारा पारित आदेश का अनुपालन सुनिश्चित न करने के कारण थानाध्यक्ष सिकंदरा को अदालत में तलब किया जाए।
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