आगरा में 27 कथित अवैध धार्मिक स्थलों के ध्वस्तीकरण हेतु न्यायालय में वाद दायर, आदेश सुरक्षित

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आगरा ।

आगरा में सार्वजनिक भूमि, सड़कों और पार्कों पर बने 27 कथित अवैध धार्मिक स्थलों (मस्जिद, मजार और दरगाह) को हटाने की मांग करते हुए एक नया विधिक वाद (वाद संख्या 819/26) दायर किया गया है।

यह वाद हिंदूवादी नेता और योगी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर अजय तोमर ने अपने अधिवक्ता शिव आधार सिंह तोमर के माध्यम से दाखिल किया है।

इस मामले की सुनवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश माननीय मृदुल दुबे के न्यायालय में संपन्न हुई।

न्यायालय ने वादी की दलीलों को सुनने के पश्चात अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। इस वाद पर न्यायालय का आदेश आज १५ जुलाई आने की संभावना है।

विधिक पृष्ठभूमि के अनुसार, न्यायालय में वाद दायर करने से पूर्व वादी द्वारा 20 अप्रैल 2026 को सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) की धारा 80 के अंतर्गत संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को एक कानूनी नोटिस भेजा गया था।

यह नोटिस आगरा के जिलाधिकारी, नगर आयुक्त (नगर निगम), लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता और छावनी परिषद के मुख्य कार्यकारी संपदा अधिकारी को प्रेषित किया गया था।

कानूनन अनिवार्य 60 दिन की नोटिस अवधि समाप्त होने के बावजूद जब प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई, तब वादी ने न्यायालय का रुख किया और वर्तमान वाद में इन्हीं अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है।

याचिका में सर्वोच्च न्यायालय के उन सख्त आदेशों का प्रमुखता से हवाला दिया गया है, जिनमें सार्वजनिक भूमि और रास्तों से धार्मिक अतिक्रमण हटाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

वादी का तर्क है कि बीच सड़क और फुटपाथ पर बने इन ढांचों (जिसमें टेढ़ी बगिया स्थित एक मस्जिद भी शामिल है) के कारण यातायात गंभीर रूप से बाधित हो रहा है।

उल्लेखनीय है कि वादी कुंवर अजय तोमर द्वारा पूर्व में आगरा के एमजी रोड पर बीच सड़क स्थित एक मजार के विरुद्ध भी इसी प्रकार का वाद दाखिल किया गया था।

उस मामले में विधिक प्रक्रिया के तहत प्रशासन द्वारा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करते हुए मजार को अन्यत्र स्थानांतरित किया जा चुका है।

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विवेक कुमार जैन
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