आगरा।
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC/ST) एक्ट के विशेष न्यायाधीश माननीय शिव कुमार ने युवती के साथ गाली-गलौज, मारपीट और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने के 11 साल पुराने मामले में ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है।
न्यायालय ने आरोपी बिरजू को दोषी करार देते हुए 3 वर्ष के कठोर कारावास और ₹10,000/- के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
क्या था मामला ?
यह मामला 6 फरवरी 2013 का है, जब थाना जगदीशपुरा क्षेत्र की निवासी श्रीमती कमलेश ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
* आरोप: वादिनी के अनुसार, ग्राम दहतोरा (थाना सिकंदरा) निवासी बिरजू पुत्र अर्जुन सिंह ने उनकी पुत्री के साथ गाली-गलौज की, मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी।
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* जातिसूचक शब्द: आरोपी ने सार्वजनिक रूप से जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर अपमानित किया था।
* त्वरित कार्रवाई: पुलिस ने घटना वाले दिन ही 6 फरवरी 2013 को आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था और मात्र 4 दिन के भीतर 10 फरवरी 2013 को अदालत में आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल कर दिया था।
न्यायालय का निर्णय:
विशेष न्यायाधीश माननीय शिव कुमार ने गवाहों के बयानों और वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी मृत्युंजय सिंह के प्रभावी तर्कों के आधार पर बिरजू को दोषी पाया।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सामाजिक समरसता बिगाड़ने और दलित उत्पीड़न जैसे मामलों में कड़ी सजा आवश्यक है।
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