आगरा।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) माननीय मृत्युंजय श्रीवास्तव ने खाकी और दबंगों की कथित मिलीभगत के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए एक बड़ा आदेश जारी किया है।
न्यायालय ने थानाध्यक्ष न्यू आगरा, संबंधित पुलिसकर्मियों और एक अन्य व्यक्ति के विरुद्ध धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और साजिश रचने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है।
मामले का संक्षिप्त विवरण: सरकारी जमीन की शिकायत से जेल तक का सफर
प्रार्थी प्रेम सिंह (निवासी दयालबाग) ने अपने अधिवक्ता हर्ष मलिक के माध्यम से अदालत को बताया कि यह पूरा विवाद वर्ष 2018 में शुरू हुआ था।
* विवाद की जड़: प्रेम सिंह ने 3 अगस्त 2018 को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत जिलाधिकारी से की थी। पैमाइश के दौरान ही विपक्षी भीकम सिंह और उसके साथियों ने प्रार्थी पर जानलेवा हमला किया, जिसका मुकदमा थाना न्यू आगरा में दर्ज हुआ।
* फर्जी लूट का केस: प्रार्थी का आरोप है कि जब उसने राजीनामा करने से इंकार कर दिया, तो भीकम सिंह ने पुलिस से मिलीभगत कर 11 मई 2022 को थाना ताजगंज में प्रार्थी के खिलाफ ‘लूट’ की एक फर्जी रिपोर्ट दर्ज करा दी, जिसमें प्रार्थी को जेल जाना पड़ा।
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हाईकोर्ट को गुमराह करने और ‘फर्जी’ गुंडा एक्ट का खुलासा:
मामले में सबसे गंभीर मोड़ तब आया जब प्रार्थी ने जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया:
* झूठा शपथ पत्र: भीकम सिंह और तत्कालीन थानाध्यक्ष ताजगंज ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र दिया कि प्रार्थी एक शातिर अपराधी है और उसके विरुद्ध थाना न्यू आगरा में वर्ष 2009 में गुंडा एक्ट (मुकदमा सं. 355/2009) दर्ज है।
* जमानत में बाधा: इस ‘आपराधिक इतिहास’ के कारण प्रार्थी को लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा।
* आरटीआई से खुली पोल: जेल से छूटने के बाद प्रार्थी ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी। न्यू आगरा पुलिस ने फिर से भीकम सिंह से मिलकर झूठी सूचना दी कि गुंडा एक्ट का मामला दर्ज है।
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* प्रशासनिक पुष्टि: अंततः एडीएम सिटी (ADM City) की कोर्ट से पुष्टि हुई कि प्रार्थी के विरुद्ध अपराध संख्या 355/2009 जैसा गुंडा अधिनियम का कोई मामला कभी दर्ज ही नहीं था।
न्यायालय का सख्त आदेश:
प्रार्थी के अधिवक्ता हर्ष मलिक ने दलील दी कि पुलिस और दबंगों ने मिलकर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए और न्यायपालिका को गुमराह कर एक निर्दोष व्यक्ति को जबरन जेल में निरुद्ध रखा।
इन तर्कों और साक्ष्यों को स्वीकार करते हुए सीजेएम माननीय मृत्युंजय श्रीवास्तव ने भीकम सिंह, तत्कालीन थानाध्यक्ष न्यू आगरा और संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश वर्तमान थानाध्यक्ष न्यू आगरा को दिया है।
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