आगरा।
दीपावली की रात एक बुजुर्ग महिला और उसके बेटे के साथ मारपीट करने और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर अपमानित करने के आरोपियों को अदालत से कोई राहत नहीं मिली है।
विशेष न्यायाधीश (SC/ST एक्ट) माननीय शिव कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी पारस गुप्ता, राज ठाकुर और अभिषेक उपाध्याय की जमानत अर्जी को सिरे से निरस्त कर दिया है।तीनों आरोपी आगरा के थाना छत्ता क्षेत्र के जीवनी मंडी (पटेल नगर) के निवासी हैं।
दीपावली की रात हुई थी वारदात:
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 31 अक्टूबर 2024 की रात करीब 10:50 बजे की है।
* विवाद की जड़: वादी पंकज कुमार अपनी मां श्रीमती ब्रज रानी के साथ पूजा करने के बाद घर के बाहर पशुओं को चारा डाल रहे थे।
* हमला: इसी दौरान आरोपियों ने वहां पहुँचकर गाली-गलौज शुरू कर दी और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। जब वादी और उसकी मां ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने उन पर स्टील की रॉड से ताबड़तोड़ हमला कर दिया।
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गंभीर चोटों और दलित उत्पीड़न का मामला:
हमले में बुजुर्ग महिला और उनके पुत्र को गंभीर (घातक) चोटें आईं।
वादी के अधिवक्ता सुधीर गर्ग और नमिता गर्ग ने अदालत में तर्क दिया कि:
* आरोपियों ने जानबूझकर एक दलित परिवार को निशाना बनाया और उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया।
* हमले में प्रयुक्त हथियार (स्टील रॉड) और चोटों की प्रकृति दर्शाती है कि इरादा जानलेवा था।
* ऐसे आरोपियों को जमानत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा और गवाहों को डराया जा सकता है।
अदालत का फैसला:
विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद माना कि आरोपियों के विरुद्ध अपराध की प्रकृति गंभीर है।
कोर्ट ने कानून व्यवस्था और पीड़ित पक्ष की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तीनों आरोपियों पारस गुप्ता, राज ठाकुर और अभिषेक उपाध्याय की जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया।
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