आगरा/प्रयागराज।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नैनी (प्रयागराज) स्थित स्वदेशी कॉटन मिल श्रमिक बस्ती पार्क के स्वामित्व और उसके रखरखाव को लेकर मचे घमासान पर कड़ा रुख अपनाया है।
अदालत ने जिलाधिकारी (DM) प्रयागराज को निर्देश दिया है कि वह स्वयं इस मामले की जाँच करें और स्पष्ट करें कि इस पार्क का असली मालिक कौन है और इसकी देखरेख की जिम्मेदारी किसकी है।
व्यावसायिक उपयोग पर लगाई रोक:
मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली तथा न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने मयंक कुमार यादव द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट आदेश दिया कि:
* पार्क का उपयोग प्रदर्शनी, मेले या किसी भी ऐसे आयोजन के लिए नहीं किया जाएगा जिससे आर्थिक लाभ अर्जित किया जाता हो।
* जिलाधिकारी यह सुनिश्चित करें कि पार्क का मूल स्वरूप बना रहे और इसका उपयोग केवल सार्वजनिक हित में हो।

अथॉरिटीज़ के बीच ‘कन्फ्यूजन’ पर कोर्ट की टिप्पणी:
सुनवाई के दौरान अलग-अलग विभागों के बयानों में विरोधाभास देखने को मिला, जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई:
* श्रम विभाग: विभाग ने दावा किया कि पार्क उनका है, लेकिन स्वीकार किया कि राजस्व रिकॉर्ड (खतौनी) में उनका नाम दर्ज नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मेले के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
* नगर निगम: निगम का कहना है कि उन्होंने पार्क के सौंदर्यीकरण और ओपन जिम पर पैसा खर्च किया है, इसलिए रखरखाव उनके पास है।
* पुलिस आयुक्तालय: पुलिस ने बताया कि उन्होंने अनुमति केवल इसलिए दी क्योंकि पार्क की भूमि श्रम विभाग की बताई गई थी।
कोर्ट ने इन दलीलों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “जब भी कोई व्यक्ति भूमि का उपयोग करना चाहता है, उसे अनुमति दे दी जाती है यह दावा स्वीकार्य नहीं है।”
25 मार्च तक दाखिल करना होगा हलफनामा:
अदालत ने जिलाधिकारी को पूरे मामले की विस्तृत जाँच कर 25 मार्च 2026 तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि सार्वजनिक पार्कों को कमाई का जरिया नहीं बनाया जा सकता।
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मामले के मुख्य बिंदु:
न्यायालय : इलाहाबाद हाईकोर्ट (मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ)
स्थान : स्वदेशी कॉटन मिल श्रमिक बस्ती पार्क, नैनी
याचिकाकर्ता : मयंक कुमार यादव
मुख्य निर्देश : मेले/प्रदर्शनी पर रोक और DM द्वारा जाँच
अगली सुनवाई : 25 मार्च के बाद (रिपोर्ट पेश होने पर)
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