आगरा।
मायके में रह रही पत्नी पर सरिया और डंडे से जानलेवा हमला करने के आरोपी पति को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ-10) माननीय काशी नाथ की अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी करने के आदेश दिए हैं।
इस मामले में मुख्य बात यह रही कि वादी मुकदमा, घायल पत्नी और अन्य परिजन गवाही के दौरान अपने बयानों से मुकर गए।
मामले की पृष्ठभूमि:
प्रकरण आगरा के थाना किरावली क्षेत्र का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, ग्राम डावली निवासी बंटी ने थाना किरावली में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि उसकी बहन श्रीमती अमीना का अपने पति बबली उर्फ बली मोहम्मद (निवासी कुर्रा चित्तरपुर, इरादत नगर) से विवाद चल रहा था, जिसके कारण वह अपने बच्चों के साथ मायके में रह रही थी।
9 जून 2023 की रात करीब 10 बजे, आरोपी बबली ने ससुराल पहुंचकर पत्नी के साथ गाली-गलौज की और विरोध करने पर सरिया व डंडे से ताबड़तोड़ प्रहार कर उसे मरणासन्न कर दिया। अमीना को गंभीर स्थिति में आईसीयू (ICU) में भर्ती कराना पड़ा था।
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मुकदमे का घटनाक्रम और कोर्ट का फैसला
ट्रायल के दौरान न्यायालय में निम्नलिखित गवाहों को पेश किया गया:
* वादी मुकदमा (साला)
* पीड़ित पत्नी (श्रीमती अमीना)
* आरोपी की पुत्री (करिश्मा)
* चचिया ससुर (सत्तार खान) एवं अन्य।
अदालत में मोड़: गवाही के दौरान सभी महत्वपूर्ण गवाह अपने पूर्व में दिए गए बयानों से मुकर गए (Hostile), जिससे अभियोजन का पक्ष कमजोर हो गया।
आरोपी के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश नारायण शर्मा एवं जय नारायण शर्मा ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को रंजिशन फंसाया गया है और रिकॉर्ड पर ऐसा कोई पुख्ता साक्ष्य नहीं है जो उसे दोषी सिद्ध कर सके।
न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के अभाव को देखते हुए आरोपी बबली उर्फ बली मोहम्मद को बाइज्जत बरी करने का आदेश जारी किया।
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