आगरा/प्रयागराज।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जौनपुर-अकबरपुर फोरलेन निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की पैमाइश में पक्षपात और मनमानी के आरोपों को गंभीरता से लिया है।
अदालत ने इस मामले में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), फाफामऊ इकाई के प्रोजेक्ट मैनेजर और एसडीएम (SDM) शाहगंज, जौनपुर को तलब करते हुए विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
क्या है विवाद ?
मामला जौनपुर के खेतासराय स्थित ग्राम गुरैनी का है। याची राम आसरे व दो अन्य ने अधिवक्ता अभिषेक यादव के माध्यम से याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि:
* फोरलेन के तहत आरसीसी सुपरमार्ट बिल्डिंग बनाने के लिए उनकी आराजी संख्या 78 का अधिग्रहण किया गया है।
* पैमाइश के दौरान अधिकारियों ने ‘पिक एंड चूज’ (पसंदीदा व्यक्ति को लाभ पहुँचाना) की नीति अपनाई।
* आरोप है कि विपक्षी ‘सीमा पुत्री सलाहुद्दीन’ को अनुचित लाभ पहुँचाने के लिए याची के खेत में 12 मीटर के बजाय 24 मीटर की पैमाइश कर ली गई।
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प्रशासनिक शिथिलता पर सवाल:
याची के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इस भेदभावपूर्ण पैमाइश के विरुद्ध 12 नवंबर 2025 को एसडीएम शाहगंज के समक्ष लिखित आपत्ति दर्ज कराई गई थी, लेकिन प्रशासन ने उस पर कोई निर्णय नहीं लिया और मनमानी जारी रखी।
अदालत का रुख:
न्यायमूर्ति एम.सी. त्रिपाठी तथा न्यायमूर्ति कुणाल रवि की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी अंतिम आदेश से पूर्व संबंधित अधिकारियों का पक्ष जानना आवश्यक है। कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा है कि पैमाइश में भेदभाव क्यों किया गया?
अदालत का निर्देश: प्रोजेक्ट मैनेजर (NHAI) और एसडीएम शाहगंज अगली सुनवाई तक इस मामले में अपनी स्पष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करें। याचिका की अगली सुनवाई 19 फरवरी 2026 को नियत की गई है।
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मामले का सारांश:
* कोर्ट: इलाहाबाद हाईकोर्ट (न्यायमूर्ति एम.सी. त्रिपाठी एवं न्यायमूर्ति कुणाल रवि)
* विवाद: जौनपुर-अकबरपुर फोरलेन भूमि अधिग्रहण की पैमाइश।
* मुख्य आरोप: 12 मीटर की जगह 24 मीटर भूमि की पैमाइश कर याची के साथ भेदभाव।
* अगली तिथि: 19 फरवरी 2026
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