आगरा/प्रयागराज।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान की रामपुर स्थित मौलाना जौहर अली यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश पारित किया है।
हाईकोर्ट ने रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जारी किए गए ध्वस्तीकरण आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
यह याचिका मौलाना अली जौहर ट्रस्ट और अन्य की ओर से दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता का मुख्य उद्देश्य रामपुर विकास प्राधिकरण की ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर अदालत से रोक लगाना था।
Also Read – इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला: बालिगों की मर्जी से हुई शादी में पुलिस का दखल गैरकानूनी, एफआईआर रद्द

इस पूरे मामले की सुनवाई जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ (डिवीजन बेंच) में हुई।
सुनवाई के दौरान जौहर यूनिवर्सिटी के अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष वर्तमान वस्तुस्थिति को स्पष्ट किया। उन्होंने खंडपीठ को अवगत कराया कि कमिश्नर कोर्ट, मुरादाबाद द्वारा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर पहले ही अंतरिम रोक (स्टे) लगा दी गई है।
विश्वविद्यालय के अधिवक्ता की इस जानकारी और कमिश्नर कोर्ट के आदेश को संज्ञान में लेने के बाद हाईकोर्ट ने मामले पर विचार किया।
अदालत ने यह निष्कर्ष निकाला कि चूंकि याचिकाकर्ताओं को निचली अदालत से राहत मिल चुकी है और कार्रवाई पर अंतरिम रोक लागू है, इसलिए उच्च न्यायालय में दाखिल यह याचिका अब पोषणीय (मेंटेनेबल) नहीं रह गई है।
इसी विधिक आधार को मानते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मौलाना अली जौहर ट्रस्ट की याचिका को हस्तक्षेप के अयोग्य ठहराते हुए खारिज कर दिया।
Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp – Channel Bulletin & Group Bulletin
- मेरठ चर्चित ‘नीला ड्रम कांड’: सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में कैपिटल अपील स्वीकार, 30 नवंबर को होगी सुनवाई - October 28, 2026
- यूपी पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती 2025: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नियुक्ति पत्र जारी करने पर लगाई रोक - October 2, 2026
- बालिग को जीवनसाथी चुनने और अपनी पसंद से रहने का मौलिक अधिकार: इलाहाबाद हाईकोर्ट - October 2, 2026





