आगरा/प्रयागराज:
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की गड्ढे में गिरने से हुई मौत के मामले में गिरफ्तार बिल्डर अभय कुमार को बड़ी राहत दी है।
कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी और हिरासत को ‘अवैध’ मानते हुए उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश जारी किया है।
मामले की पृष्ठभूमि:
यह मामला नोएडा का है, जहाँ सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की एक खुले गड्ढे में गिरने के कारण दुखद मृत्यु हो गई थी। इस घटना के संबंध में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार किया था।
इस गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए अभय कुमार की ओर से हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका दाखिल की गई थी।
हाईकोर्ट की मुख्य टिप्पणियां और कार्यवाही:
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले के विभिन्न कानूनी पहलुओं पर विचार किया:
* गिरफ्तारी नियमों का उल्लंघन: याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि गिरफ्तारी के समय गिरफ्तारी मेमो के क्लॉज 13 की अनिवार्य आवश्यकताओं का पालन नहीं किया गया। साथ ही, गिरफ्तारी से पहले याची को इसके कारणों या प्रक्रिया की जानकारी नहीं दी गई थी।

* कोर्ट का रुख: कोर्ट ने माना कि इस मामले में गिरफ्तारी की प्रक्रिया में तय नियमों की अनदेखी की गई है, जिससे यह हिरासत कानूनन सही नहीं ठहरती।
* तत्काल रिहाई के निर्देश: याचिका को मंजूर करते हुए बेंच ने संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया कि अभय कुमार को तुरंत रिहा किया जाए।
* प्रक्रिया में तेजी: कोर्ट ने सरकारी अधिवक्ता (AGA) को निर्देशित किया कि वे इस आदेश की जानकारी संबंधित अधिकारियों को तुरंत दें और आदेश की प्रमाणित प्रति (Certified Copy) का इंतज़ार किए बिना ही रिहाई सुनिश्चित करवाएं।
अहम तथ्य:
पीठ: जस्टिस सिद्धार्थ एवं जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय
याचिका का प्रकार: बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus)
मुख्य आधार: गिरफ्तारी मेमो के क्लॉज 13 का उल्लंघन
कोर्ट का फैसला: याचिका मंजूर, तत्काल रिहाई का आदेश
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