आगरा:
विशेष न्यायाधीश (आर्थिक अपराध) माननीय पवन कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने विद्युत चोरी के 18 वर्ष पुराने एक मामले में विद्युत विभाग एवं पुलिस की लापरवाही को रेखांकित करते हुए आरोपी को दोषमुक्त करार दिया है।
अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य, जब्ती सामग्री और गवाहों की अनुपस्थिति के चलते कुबेरपुर, थाना एत्मादपुर निवासी मुकेश पुत्र प्रभु को बरी करने का आदेश जारी किया।
अभियोजन के अनुसार, 30 अगस्त 2008 को अवर अभियंता सुरेश चंद वर्मा, उपखंड अधिकारी वाई. एस. राघव और अन्य कर्मियों की टीम ने कुबेरपुर क्षेत्र में चेकिंग की थी।
आरोप था कि पूर्व में बकाया बिल के चलते कनेक्शन काटे जाने के बावजूद आरोपी छह हॉर्स पावर की मोटर लगाकर अवैध कटिया डालकर आटा चक्की चला रहा था।
विभाग ने मौके से मोटर और केबल बरामद करने का दावा करते हुए आरोपी के खिलाफ धारा 138 विद्युत अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया था।
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मामले की सुनवाई के दौरान विभाग और पुलिस की ओर से घोर शिथिलता सामने आई। टीम में कई गवाह होने के बावजूद केवल वादी अवर अभियंता की गवाही ही दर्ज कराई जा सकी।
इसके अलावा न तो मौके से कथित रूप से बरामद मोटर व केबल अदालत में पेश की गई और न ही छापे से संबंधित फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी या चेकिंग रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सकी।
आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता भारत सिंह ने तर्क प्रस्तुत किया कि अभियोजन पक्ष मामले को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है।
अदालत ने बचाव पक्ष के तर्कों और पत्रावली पर मौजूद तथ्यों पर विचार करते हुए आरोपी को विद्युत चोरी के आरोपों से बरी करने का फैसला सुनाया।
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