वादी अधिवक्ता ने कहा कि सेशन कोर्ट में दाखिल करेंगें पुनरीक्षण याचिका
आगरा ६ मई ।
हिमाचल के मंडी क्षेत्र से भाजपा सांसद एवं फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के विरुद्ध स्पेशल कोर्ट एमपी एमएलए माननीय अनुज कुमार सिंह की कोर्ट में विचाराधीन वाद को कोर्ट ने आज खारिज कर दिया ।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जो टिप्पणी कंगना रनौत द्वारा किसानों को प्रति की गई है उस टिप्पणी के बाबत वादी अधिवक्ता अथवा उनका कोई परिवारी जन उस धरने में शामिल नहीं था। साथ ही कोर्ट ने एक टिप्पणी यह भी की है कि महात्मा गांधी के प्रति कंगना रनौत ने जो टिप्पणी की थी लेकिन महात्मा गांधी की मृत्यु हो चुकी है इस कारण उनका पीड़ित परिवार का कोई व्यक्ति ही इस बात के लिए उक्त वाद दायर कर सकता है। तीसरा पहलू कोर्ट ने यह लिया है कि उक्त वाद दायर करने से पूर्व किसी मजिस्ट्रेट की अनुमति नहीं ली गई।
वादी वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने उक्त आदेश की बाबत कहा है कि वह माननीय न्यायालय का सम्मान करते हैं। लेकिन कोर्ट ने जिन तथ्यों को लेकर वाद खारिज किया है। वह तीनों ही तथ्य निराधार हैं। क्योंकि कंगना रनौत ने किसी एक किसान के लिए नहीं कहा था बल्कि धरने पर बैठे लाखों किसानों के लिए कंगना रनौत की टिप्पणी थी कि वहां पर हत्याएँ हो रही थी बलात्कार हो रहे थे और अगर देश का नेतृत्व मजबूत नहीं होता तो अलगाव की स्थिति पैदा हो जाती।
कंगना ने अपना वक्तव्य 20 अगस्त 20 से दिसंबर 21 तक करीब 15 महीने तक केंद्र सरकार के काले कानूनो के विरोध में धरना दे रहे लाखों किसानों के विरुद्ध दिया था।
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जिसमें करीब 700 से अधिक किसानों की ठंड गर्मी और बरसात से मृत्यु भी हो चुकी थी।तपती गर्मी ठंड बरसात में लाखों किसान सारे देश के किसानों की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे। कंगना की टिप्पणी किसी एक किसान के लिए नहीं थी कंगना की टिप्पणी धरने पर बैठे देश के कोने कोने से आए उन लाखों किसानों के विरुद्ध थी जो धरने पर बैठे थे। इस प्रकार कंगना ने देश के करोड़ों अन्न दाताओं का अपमान किया था । उन्हें हत्यारा बलात्कारी और अलगाववादी बताया था ।
जहां तक कोर्ट का यह कहना है कि महात्मा गांधी के प्रति की गई टिप्पणी के लिए महात्मा गांधी की मृत्यु हो चुकी है और उनके पीड़ित परिवार का ही कोई व्यक्ति वाद दायर कर सकता है। तो यह बड़ा ही बेतुका तथ्य है । क्योंकि आजाद भारत के नागरिक हम सब लोग हैं और महात्मा गांधी के प्रति कंगना रनौत ने यह कहा था कि गाल पर चांटा खाने से भीख मिलती आजादी नहीं और 1947 में जो आजादी मिली वह महात्मा गांधी के भीख के कटोरे में मिली थी। कंगना ने अपने शब्दों में उन क्रांतिकारी शहीदों सेनानियों एवं देशवासियों का अपमान किया है जिन्होंने देश की आजादी के लिए कुर्बानियां दी थी।
क्योंकि हम आजाद भारत के नागरिक हैं और हमारे राष्ट्रपिता का अपमान हमारे स्वतंत्रता सेनानियों, क्रांतिकारियों और शहीदों का अपमान हम सब का अपमान है। यहां तक कि न्यायपालिका में बैठे हुए उन श्रीमान जज साहब का भी अपमान है जो आज इस कुर्सी पर बैठे हैं। तीसरा तथ्य जो कोर्ट दिया है कि वाद दाखिल करने से पूर्व किसी न्यायालय की अनुमति नहीं ली गई तो क्या राहुल गांधी और केजरीवाल के विरुद्ध दायर मामलों में क्या किसी कोर्ट से अनुमति दी गई थी और अगर ऐसा लगता है तो माननीय न्यायालय को जब मैंने 11 सितंबर 2024 को उक्त वाद दायर किया था तो उन्हें तभी खारिज कर देना चाहिए था।
लेकिन मुझे नहीं लगता क्योंकि कोर्ट ने अपने न्यायिक विवेक का प्रयोग नहीं किया है। तीनों ही उनकी दलीलें निराधार हैं मैं इस निर्णय के विरुद्ध स्पेशल कोर्ट एमपी में सेशन कोर्ट में शीघ्र ही रिवीजन दायर करूंगा । मैंने बाद पत्र के साथ अखबारों की मूल प्रतियां कंगना रनौत की इंस्टाग्राम की टिप्पणी राहुल गांधी और केजरीवाल के विरुद्ध दायर किए गए मुकदमों की प्रतियां दाखिल की थी ।

लेकिन कोर्ट ने इन सबको नजर अंदाज किया है और मैं इसके खिलाफ चूंकि मै स्वतंत्र भारत का जिम्मेदार नागरिक हूं, अधिवक्ता हूं किसान का बेटा हूं, मैं इस लड़ाई को लड़ूंगा और तब तक लडूंगा जब तक की कंगना को सजा नहीं होती या तो कंगना माफी मांगे।
अन्यथा में हाई कोर्ट तक मामले को ले जाऊँगा । कोर्ट ने तीन बार नोटिस भेजे जो कंगना को रिसीव हो गए उसके बाद भी कोर्ट कंगना को बार बार समय देता रहा। और 9 महीने के बाद उक्त केस बिना किसी आधार के निरस्त कर दिया।
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