आगरा।
थाना न्यू आगरा क्षेत्र के कल्याणी हाइट्स के पीछे हुए बहुचर्चित गोलीकांड में अदालत ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
अपर जिला जज (कोर्ट संख्या 25) माननीय मदन मोहन की अदालत ने मामले की गंभीरता से सुनवाई करते हुए नामजद 14 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बाइज्जत बरी करने के आदेश दिए हैं।
दिलचस्प बात यह है कि इसी मामले में कुछ दिनों पहले अदालत ने मुख्य और कुख्यात आरोपी आलोक यादव की पत्रावली (फाइल) पृथक करते हुए उसे दोषी पाया था और आजीवन कारावास व तीन लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी।
जानिए क्या था पूरा मामला ?
न्यू आगरा थाने में दर्ज मुकदमे के अनुसार, यह घटना 25 जून 2023 की रात की है। मामले के वादी और तत्कालीन उपनिरीक्षक अजीत सिंह अपने अधीनस्थ पुलिसकर्मियों के साथ क्षेत्र में गश्त पर थे।
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इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि कल्याणी हाइट्स अपार्टमेंट के पीछे अंधाधुंध गोलियां चल रही हैं और कुछ युवक घायल हुए हैं।
पुलिस जब मौके पर पहुंची, तो वहां एक सफेद रंग की फॉर्च्यूनर कार खड़ी दिखाई दी।
पुलिस को आते देख कार सवार बदमाश एक घायल युवक को जबरन गाड़ी में डालकर और तमंचे लहराते हुए मौके से फरार हो गए।
हालांकि, वे एक अन्य घायल युवक को वहीं छोड़ गए, जिसके पैर में गोली लगी थी।
घायलों ने बयां की थी आपबीती:
मौके पर मिले घायल युवक ने पुलिस को अपना नाम नीरज (निवासी नगला हवेली, दयालबाग) बताया था। उसने यह भी जानकारी दी कि जिस युवक को बदमाश कार में डालकर ले गए हैं, उसका नाम राहुल है।
घायल नीरज ने पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया था कि सफेद रंग की कार से उतरे कुख्यात आलोक यादव और उसके अन्य साथियों ने उन पर जानलेवा हमला करते हुए गोलियां चलाई थीं।
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पुलिस ने इन 14 आरोपियों के खिलाफ पेश की थी चार्जशीट:
पुलिस ने मामले की गहन विवेचना करने के बाद मुख्य आरोपी आलोक यादव के साथ-साथ वारदात में शामिल होने के आरोप में 14 अन्य लोगों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था।
बरी होने वाले आरोपियों में शामिल हैं:
* परमजीत सिंह काके, विशेष बघेल, सेंकी यादव, निमेष चौहान और दीपक जैसवाल।
* ललित गोरख, सत्यवीर उर्फ रिंकू, गुलजार कुरैशी, रोहित सिकरवार और राजा।
* सौरभ चौधरी, शोभित यादव, अजय सिंह और कुलदीप।
गवाहों के पलटने से बरी हुए आरोपी:
इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब मुख्य आरोपी आलोक यादव की पत्रावली अलग होने के बाद, शेष 14 आरोपियों के मामले की सुनवाई शुरू हुई।
अदालत में उन्हीं पुलिसकर्मियों और उन्हीं दोनों घायल युवकों (नीरज व राहुल) की गवाही कराई गई, जिनकी गवाही पर आलोक यादव को उम्रकैद हुई थी।
परंतु, इस बार सुनवाई के दौरान घायल युवकों और मुख्य गवाहों ने अदालत के समक्ष इन 14 आरोपियों के विरुद्ध गवाही देने से साफ इनकार कर दिया (गवाह मुकर गए)।
न्यायालय ने पाया कि पत्रावली पर इन आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस और विश्वसनीय सबूत मौजूद नहीं है।
इसी साक्ष्य के अभाव (बेनेफिट ऑफ डाउट) को आधार मानते हुए न्यायाधीश माननीय मदन मोहन ने सभी 14 आरोपियों को दोषमुक्त करने का आदेश जारी कर दिया।
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