आगरा ।
आगरा के विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट माननीय राजीव कुमार पालीवाल की अदालत ने गांजा बरामदगी के एक मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली को अपर्याप्त मानते हुए आरोपी को बरी कर दिया है।
अदालत ने थाना ट्रांस यमुना क्षेत्र के इस्लाम नगर निवासी अली हसन की जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए उसकी रिहाई के आदेश जारी किए हैं।
पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, दरोगा अमित कुमार ने अपनी तहरीर में बताया था कि 17 जून को वह दरोगा हिमांशु सैनी, मोहित कुमार और अन्य पुलिसकर्मियों के साथ थाना क्षेत्र में गश्त पर थे।
इसी दौरान उन्होंने आरोपी अली हसन के ऑटो को चेकिंग के लिए रोका। पुलिस का दावा था कि ऑटो की सीट के नीचे से 1 किलो 772 ग्राम गांजा बरामद हुआ, जिसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
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हालांकि, अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता ने पुलिस की कहानी पर कड़े सवाल उठाए।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि सरेआम चेकिंग और जब्ती के बावजूद पुलिस ने मौके से किसी भी स्वतंत्र नागरिक को गवाह नहीं बनाया, जो कि कानूनी प्रक्रिया में संदेह पैदा करता है।
इसके अतिरिक्त, अधिवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि बरामद गांजे की कुल मात्रा (1.772 किलोग्राम) वाणिज्यिक मात्रा (20 किलोग्राम) की सीमा से बहुत कम है।
अदालत ने बचाव पक्ष की इन दलीलों को ठोस मानते हुए, स्वतंत्र गवाहों के अभाव और कम मात्रा के आधार पर आरोपी को राहत प्रदान की।
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