उत्तर प्रदेश के डीजीपी सभी पुलिस अधिकारियों को जारी करें सर्कुलर
अभियुक्त की गिरफ्तारी व रिमांड आदेश रद्द, तत्काल रिहाई का निर्देश
आगरा/प्रयागराज ११ अप्रैल ।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने थाना मिलक रामपुर में दर्ज आपराधिक मामले में मंजीत सिंह की गिरफ्तारी व मजिस्ट्रेट के रिमांड आदेश को रद्द कर दिया है और अन्य केस में वांछित न होने की दशा में तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने डीजीपी को आदेश दिया है कि वह प्रदेश के सभी पुलिस कमिश्नर, एसएसपी व एसपी को सर्कुलर जारी कर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 50 व 50 ए अब बीएनएसएस की धारा 47 व 48 सहित अनुच्छेद 22(1) का अभियुक्त की गिरफ्तारी के समय अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दे।
इन प्रावधानों के अंतर्गत अभियुक्त की गिरफ्तारी के समय उसे गिरफ्तारी का कारण व आधार बताना जरूरी है। साथ ही उसे विधिक सहायता या अपने वकील से संपर्क करने की अनुमति देना जरूरी है। याची की गिरफ्तारी व रिमांड के समय इन उपबंधो का पालन नहीं किया गया।जिस पर गिरफ्तारी व रिमांड आदेश की वैधता को चुनौती दी गई थी।
यह आदेश न्यायमूर्ति एम सी त्रिपाठी तथा न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने मंजीत सिंह उर्फ इंदर उर्फ मंजीत सिंह चना की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
याची अधिवक्ता का कहना था कि 15 फरवरी 24 को दर्ज एफआईआर के तहत उसे गिरफ्तार कर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। 26 दिसंबर 24 को मजिस्ट्रेट ने रिमांड मंजूर कर ली। मिलक थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 420,467,468,469,406,504,506 के तहत एफआईआर दर्ज है।याची अधिवक्ता का कहना है कि उसकी गिरफ्तारी ही गैर कानूनी है। कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।
इसलिए रिमांड आदेश भी संविधान के अनुच्छेद 22(1) व धारा 50 के विपरीत है।यहां तक कि गिरफ्तारी मेमो में गिरफ्तारी का कारण व आधार का कोई कालम ही नहीं है।
प्रिंटेड प्रोफार्मा में मेमो पर कार्रवाई की गई है।याची को गिरफ्तारी के समय अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया न ही विधिक सहायता उपलब्ध कराई गई। सरकारी वकील का कहना था कि मजिस्ट्रेट ने गिरफ्तारी का कारण व आधार बताने का प्रयास किया। विधिक सहायता प्राप्त करने का मौका भी दिया था।
किंतु कोर्ट ने गिरफ्तारी मेमो में गिरफ्तारी का कारण व आधार लिखने का कालम न होने व कानून का पालन न करने पर गिरफ्तारी व रिमांड रद्द कर दी ।
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