आगरा।
आगरा मेट्रो प्रोजेक्ट के कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही बरतने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है।
मेट्रो के प्रबंध निदेशक (MD) और डायरेक्टर समेत अन्य अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने वाली याचिका पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) माननीय मृत्युंजय श्रीवास्तव की अदालत ने सुनवाई के लिए 31 जनवरी की तिथि निर्धारित की है।
क्या है पूरा मामला ?
अधिवक्ता चौधरी समीर ने अदालत में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर मेट्रो के बड़े अधिकारियों को पक्षकार बनाया है।
याचिका में यूपीएमआरसी (UPMRC) के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार, डायरेक्टर अरविंद कुमार राय और सिविल इंजीनियर सी.पी. सिंह पर लापरवाही का आरोप लगाया गया है।
हादसे की दास्तान:
अधिवक्ता चौधरी समीर के अनुसार, यह घटना 28 नवंबर 2025 की रात करीब 9:25 बजे की है । वे आगरा कैंट स्टेशन से अपने घर लौट रहे थे।
प्रतापुरा और कमिश्नर ऑफिस के बीच मेट्रो प्रोजेक्ट का एक कर्मी अचानक खुले कट से सिर पर सामान रखकर सड़क पर आ गया।
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उस कर्मी की जान बचाने के प्रयास में अधिवक्ता ने अपनी कार को तेजी से दाईं ओर मोड़ा और इमरजेंसी ब्रेक लगाए। इस दौरान कार वहां रखे भारी-भरकम पत्थरों से जा टकराई। हादसे में कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और अधिवक्ता स्वयं गंभीर रूप से घायल हो गए।
सुरक्षा उपायों पर उठाए सवाल:
प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि मेट्रो अधिकारियों ने निर्माण स्थल पर जनमानस की सुरक्षा के लिए समुचित उपाय (जैसे बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड) अमल में नहीं लाए हैं। खुले कट और अव्यवस्थित तरीके से रखे पत्थर राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं।
अदालत का रुख:
सीजेएम माननीय मृत्युंजय श्रीवास्तव ने मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना सदर से आख्या (रिपोर्ट) तलब की है।
अब 31 जनवरी को होने वाली सुनवाई के बाद तय होगा कि इन उच्चाधिकारियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए जाएंगे या नहीं।
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