आगरा के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-4) माननीय पवन कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने पत्नी को दहेज के लिए प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिए विवश करने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दोषी पति को 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला थाना खंदौली क्षेत्र का है। वादिया श्रीमती बिट्टी देवी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी पुत्री साधना का विवाह घटना से छह वर्ष पूर्व ग्राम वास अगरिया, थाना खंदौली निवासी रवि कुमार (पुत्र जवाहर सिंह) के साथ हुआ था।
आरोप था कि विवाह के बाद से ही दहेज की मांग को लेकर पति रवि और उसके परिजनों द्वारा साधना का लगातार शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा था।
इसी प्रताड़ना से तंग आकर 15 अप्रैल 2024 की रात करीब 8 बजे साधना ने फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी।
घटना के बाद पुलिस ने मृतका की मां की तहरीर पर मामला दर्ज किया और त्वरित कार्रवाई करते हुए 23 अप्रैल 2024 को आरोपी पति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

विवेचना के दौरान अन्य ससुरालियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर पुलिस ने केवल पति रवि के विरुद्ध 16 जुलाई 2024 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।
न्यायालय में सुनवाई के दौरान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मंगल सिंह ने अभियोजन की ओर से कड़ा पक्ष रखा।
मामले को संदेह से परे साबित करने के लिए वादिया बिट्टी देवी, मृतका के पिता रामेश्वर नागोरिया, बहन अंजली और विवेचक एसीपी पीयूष कांत राय सहित कुल 9 गवाहों को अदालत में पेश किया गया।
न्यायाधीश माननीय पवन कुमार श्रीवास्तव ने गवाहों के बयानों, मृतका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और शासकीय अधिवक्ता के तर्कों को सुनने के बाद आरोपी पति रवि कुमार को दोषसिद्ध करार दिया और उसे इस गंभीर अपराध के लिए 10 वर्ष की कैद व जुर्माने से दंडित किया।
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