साक्ष्य के अभाव में सरेआम अश्लील हरकत के चार आरोपी 16 वर्ष बाद बरी

न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) माननीय शारिब अली की अदालत ने सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करने के 16 वर्ष पुराने मामले में फैसला सुनाते हुए एक महिला सहित चार आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, थाना सिकंदरा में तत्कालीन उप निरीक्षक कृष्ण नंदन तिवारी ने 3 अक्टूबर 2010 को यह मुकदमा दर्ज कराया था।

आरोप था कि राहगीरों की सूचना पर पुलिस टीम महिला कांस्टेबल हेमलता के साथ शेखर रेजीडेंसी के मुख्य गेट के समीप पहुंची, जहां तीन युवक और दो युवतियां सरेआम अश्लील हरकत कर रहे थे।

पुलिस ने मौके से रत्नेश राजपूत (निवासी कैलाश पुरी), मोनू चौहान (निवासी मैनपुरी), अभिषेक (निवासी ऋषि पुरम), सुनीता (निवासी कौशल पुर) और संगीता उर्फ मोना (निवासी नारायण नगर) को भारतीय दंड संहिता की धारा 294 के तहत हिरासत में लिया था।

मामले की विवेचना के दौरान आरोपी बनाई गई संगीता उर्फ मोना ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर घटना में शामिल न होने का दावा किया, जिसके बाद अदालत के आदेश पर पुलिस ने उसका नाम केस से निकाल दिया।

Also Read – आगरा उपभोक्ता आयोग प्रथम का सख्त फैसला, क्लेम खारिज करने पर मनीपाल सिग्ना को देने पड़ें 1.47 लाख रुपये 

मुकदमे की सुनवाई के दौरान केवल वादी दरोगा कृष्ण नंदन तिवारी और संगीता की ही गवाही दर्ज हो सकी। संगीता ने अदालत में बयान दिया कि वह घटना के दिन वहां से गुजर रही थी।

उसने देखा कि पुलिस ने तीन लड़कों और एक महिला को पकड़ रखा है। पुलिस ने उससे सादे कागज पर हस्ताक्षर करा लिए थे और कहा था कि जरूरत पड़ने पर बुलाएंगे। उसने स्पष्ट किया कि वह उन युवकों को नहीं जानती और न ही उसके साथ कोई हरकत हुई थी।

अदालत में बचाव पक्ष के अधिवक्ता मुकेश शर्मा ने अभियोजन की कहानी पर सवाल उठाए।

Also Read – न्यायालय का कड़ा फैसला: दहेज के लिए पत्नी को आत्महत्या हेतु विवश करने वाले दोषी पति को 10 वर्ष का कारावास

सीजेएम माननीय शारिब अली ने मामले का अवलोकन करने के बाद पाया कि मामले में कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है।

इसके अलावा, पुलिस द्वारा घटना की सूचना का मीमो न बनाना और सभी आरोपियों को फर्द (बरामदगी/गिरफ्तारी मेमो) की प्रति न देना जांच की बड़ी खामियां रहीं।

अदालत ने इन तथ्यों और साक्ष्यों के अभाव को आधार मानते हुए आरोपी रत्नेश राजपूत, मोनू चौहान, अभिषेक और सुनीता को बरी करने के आदेश दिए।

Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp  – Channel BulletinGroup Bulletin

विवेक कुमार जैन
Follow me

1 thought on “साक्ष्य के अभाव में सरेआम अश्लील हरकत के चार आरोपी 16 वर्ष बाद बरी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *