गिरोहबंद अधिनियम: साक्ष्य के अभाव में दो आरोपी 12 साल बाद बरी

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आगरा।

विशेष न्यायाधीश (गिरोहबंद अधिनियम) माननीय विवेक कुमार की अदालत ने थाना फतेहपुर सीकरी में दर्ज गैंगस्टर एक्ट के एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है। यह फैसला मुकदमा दर्ज होने के करीब 12 साल बाद आया है।

अदालती दस्तावेजों के अनुसार, तत्कालीन थानाध्यक्ष अनिल प्रताप सिंह ने थाना फतेहपुर सीकरी में इन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।

पुलिस द्वारा अदालत में पेश किए गए गैंग चार्ट और एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि ग्राम उंदेरा निवासी पुष्पेंद्र पुत्र अजब सिंह एक गैंग लीडर है, जबकि उसी गांव का निवासी अनिल पुत्र वीरेंद्र इस गैंग का सक्रिय सदस्य है।

पुलिस का दावा था कि यह गिरोह लूटपाट, चोरी और अन्य आपराधिक वारदातों को अंजाम देता है तथा इलाके में इनकी इतनी दहशत है कि कोई भी आम नागरिक इनके खिलाफ गवाही देने को तैयार नहीं होता।

पुलिस ने यह भी आरोप लगाया था कि इन आरोपियों ने आपराधिक गतिविधियों के माध्यम से काफी धन और संपत्ति अर्जित की है।

इस मामले को अदालत में साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष की ओर से वादी मुकदमा (तत्कालीन थानाध्यक्ष अनिल प्रताप सिंह) सहित कुल चार गवाहों को पेश किया गया।

वहीं, आरोपियों की ओर से उनके अधिवक्ता अरुण पचौरी और शुभम झा ने अदालत में मजबूत तर्क प्रस्तुत किए।

बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने जिरह के दौरान कहा कि पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं और उन्हें साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है।

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध गवाहों के बयानों का गहनता से अवलोकन करने के बाद अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को अपर्याप्त माना।

अंततः ठोस साक्ष्य के अभाव में विशेष न्यायाधीश ने दोनों आरोपियों (पुष्पेंद्र और अनिल) को बरी करने के आदेश पारित किए।

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विवेक कुमार जैन
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