आगरा के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (प्रथम) ने स्वास्थ्य बीमा कंपनी द्वारा गलत तरीके से क्लेम खारिज करने के मामले में परिवादी के पक्ष में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है।
इस आदेश के अनुपालन में बीमा कंपनी को कुल 1,47,311 रुपये का भुगतान परिवादी को करना पड़ा है।
आगरा के सैनिक नगर निवासी आलोक कुमार माथुर ने मनीपाल सिग्ना हेल्थ इंश्योरेंस से अपने और अपनी पत्नी के लिए 25,467/- रुपये का प्रीमियम देकर एक कैशलेस स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदी थी।
दिसंबर 2024 में पत्नी ज्योति माथुर की अचानक तबीयत खराब होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उनके इलाज और उसके बाद की नियमित जांच व दवाइयों में कुल मिलाकर लगभग 1,13,506/- रुपये का खर्च आया।
इलाज के बाद जब परिवादी ने क्लेम के लिए आवेदन किया, तो बीमा कंपनी ने मार्च 2025 में देरी से क्लेम प्रस्तुत करने का हवाला देते हुए दावे को खारिज कर दिया।
इसके बाद आलोक कुमार माथुर ने उपभोक्ता आयोग की शरण ली और सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए परिवाद दायर किया।
आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए 11 जून 2026 को अपना फैसला सुनाया।
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आयोग ने इसे बीमा कंपनी की सेवा में भारी कमी माना और कंपनी को इलाज का खर्च 1,12,026/- रुपये छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ चुकाने का आदेश दिया।
इसके अतिरिक्त, कंपनी पर मानसिक पीड़ा के लिए 20,000/- रुपये और वाद व्यय के रूप में 10,000/- रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
आयोग के इस सख्त आदेश के बाद मनीपाल सिग्ना हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी ने कुल 1,47,311/- रुपये की डिक्री धनराशि आयोग के खाते में जमा करा दी।
इसके बाद 1 सितंबर 2026 को परिवादी आलोक कुमार माथुर को पंजाब नेशनल बैंक के चेक के माध्यम से यह पूरी धनराशि माननीय सर्वेश कुमार द्वारा सौंप दी गई है।
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