आगरा के यूनिवर्सिटी मॉडल स्कूल खंदारी कैंपस में अध्ययनरत छात्र ऋषभ मिठास की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में एक नया मोड़ आ गया है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय शारिब अली ने थाना न्यू आगरा पुलिस द्वारा प्रस्तुत की गई अंतिम रिपोर्ट (एफआर) को निरस्त कर दिया है।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए किसी नए और निष्पक्ष अधिकारी से अग्रिम विवेचना कराने के आदेश दिए हैं।
इस प्रकरण की शुरुआत 23 मार्च 2022 को हुई थी, जब वादी ब्रह्म दत्त मिठास ने अपने पुत्र ऋषभ को प्रैक्टिकल परीक्षा के लिए विद्यालय के गेट पर छोड़ा था।
उसी दिन सुबह सवा ग्यारह बजे विद्यालय प्रबंधन की ओर से उन्हें सूचना दी गई कि उनके पुत्र की बालकनी से गिरकर मृत्यु हो गई है। इस हृदयविदारक घटना के बाद वादी ने अज्ञात लोगों के विरुद्ध अपने पुत्र की हत्या एवं अन्य संबंधित धाराओं में थाना न्यू आगरा में मुकदमा दर्ज कराया था।
पुलिस ने इस मामले की विवेचना के उपरांत अदालत में अपनी अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी, जिसे वादी ने सिरे से खारिज कर दिया। इसके विरोध में मृतक के पिता ने अपने अधिवक्ता गगन शर्मा के माध्यम से अदालत में प्रोटेस्ट याचिका दाखिल की।
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वादी ने तत्कालीन थानाध्यक्ष न्यू आगरा अरविंद कुमार निर्वाल की कार्यप्रणाली पर कड़ा अविश्वास व्यक्त करते हुए विवेचना में भारी अनियमितता बरतने के आरोप लगाए थे और मामले की निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई थी।
वादी के अधिवक्ता के तर्कों से सहमत होते हुए सीजेएम शारिब अली ने पुलिस की एफआर को खारिज कर दिया। अदालत ने सख्त निर्देश दिए हैं कि इस प्रकरण की अग्रिम विवेचना ऐसे अधिकारी को सौंपी जाए जो पूर्व की जांच से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से न जुड़ा हो।
इसके साथ ही, विधि विज्ञान प्रयोगशाला की 26 अगस्त 2022 और 22 जून 2023 की दोनों अलग-अलग रिपोर्टों का तुलनात्मक एवं वैज्ञानिक परीक्षण करने को कहा गया है, ताकि दोनों में आए भिन्न निष्कर्षों के वास्तविक कारणों को स्पष्ट किया जा सके।
मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में यह भी निर्देशित किया है कि घटनास्थल का दोबारा बारीकी से मुआयना किया जाए।
विशेषकर हॉस्टल की तीसरी मंजिल की बालकनी, प्रशासनिक भवन की छत और जिस स्थान पर शव मिला था, उसके बीच की वास्तविक दूरी, ऊंचाई और तत्कालीन परिस्थितियों का पुनः वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाना चाहिए।
अग्रिम विवेचना पूरी होने के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत नई विस्तृत रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं।
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