आगरा/प्रयागराज।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 28 अक्टूबर को कोर्ट नंबर 49 में वकीलों द्वारा किए गए हिंसक प्रदर्शन, मारपीट और तोड़फोड़ के मामले को बेहद गंभीरता से लिया है।
जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने इस कृत्य को न्याय प्रशासन में गंभीर हस्तक्षेप और आपराधिक अवमानना का प्रथम दृष्टया मामला करार दिया है।
अदालत ने मुख्य न्यायाधीश से घटना में शामिल वकीलों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने और एफआईआर दर्ज कराने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है।
घटना के विस्तृत विवरण के अनुसार, 28 अक्टूबर की सुबह कोर्ट रूम में वकीलों के एक समूह द्वारा किए गए उग्र व्यवहार और नारेबाजी के कारण न्यायाधीशों को अपनी कार्यवाही रोकनी पड़ी थी।
अदालत के आदेश में उल्लेख है कि न्यायाधीशों के उठने के बाद कुछ वकीलों ने सरकारी अधिवक्ता (एजीए-वन) परितोष कुमार मालवीय पर हमला किया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं।

बचाव करते हुए मालवीय जजों के चैंबर तक पहुंचे। इस दौरान अन्य सरकारी अधिवक्ताओं, कोर्ट कर्मचारियों और सुरक्षा में तैनात पुलिस व सीआरपीएफ कर्मियों के साथ भी मारपीट की गई तथा कोर्ट के फर्नीचर को नुकसान पहुंचाया गया।
हाईकोर्ट ने मामले में रजिस्ट्रार जनरल की रिपोर्ट और उपलब्ध वीडियो फुटेज का संज्ञान लिया। पीठ ने कहा कि यह कृत्य न केवल न्यायिक कार्यवाही में बाधा है, बल्कि अदालत की गरिमा पर सीधा हमला है।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि बार और बेंच के बीच मतभेद हो सकते हैं, किंतु अदालत परिसर में हिंसा, धमकी और न्यायिक कार्यों में व्यवधान की अनुमति नहीं दी जा सकती।
इसके अतिरिक्त, अदालत ने सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़ी भ्रामक और फर्जी पोस्ट्स पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उन्हें तत्काल हटाने और ऐसा करने वालों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने पर विचार करने का निर्देश दिया है।
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