आगरा।
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट माननीय दिनेश कुमार चौरसिया की अदालत ने अपहरण, दुराचार और पॉक्सो एक्ट के एक मामले में आरोपी को बरी करने के आदेश दिए हैं।
अदालत ने यह फैसला पीड़िता के बयानों में पाए गए गंभीर विरोधाभास और साक्ष्यों की कमी को आधार बनाते हुए सुनाया।
मामले में बरी किए गए आरोपी का नाम नंदू है, जो थाना सदर क्षेत्र के सेवला जाट (नई आबादी) का निवासी है।
थाना सदर में दर्ज कराए गए मुकदमे के अनुसार, वादिया ने आरोप लगाया था कि 11 जुलाई 2015 को जब वह अपने पति के साथ बाहर गई थी और उसकी नाबालिग पुत्री घर पर अकेली थी, तब आरोपी नंदू ने सहयोगियों के साथ घर में घुसकर दुराचार किया।
आरोप यह भी था कि शिकायत के बावजूद 13 जुलाई 2015 को आरोपी और उसके परिजनों ने पीड़िता को जबरन ले जाने का प्रयास किया।
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इसके बाद 23 जुलाई 2015 को जब पीड़िता अपनी बड़ी बहन के घर नगला परसोती गई थी, तो आरोपी वहां से भी परिजनों के विरोध के बाद उसका अपहरण कर ले गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में वादिया और पीड़िता समेत कुल छह गवाह पेश किए गए।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पीड़िता ने पुलिस और मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए शुरुआती बयानों में अपनी मर्जी से आरोपी के साथ जाने की बात कही थी, जबकि अदालत में उसने आरोपी के विरुद्ध बयान दिए।
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न्यायालय ने पाया कि पीड़िता के तीनों बयानों में गंभीर विरोधाभास था। इसके अतिरिक्त, घटना के समय मौजूद बताई गई पीड़िता की बहन और मोहल्ले के अन्य महत्वपूर्ण गवाहों को अदालत में पेश नहीं किया गया।
आरोपी के वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र कुमार कर्दम के तर्कों, बयानों के विरोधाभास और पुख्ता साक्ष्यों के अभाव को देखते हुए विशेष अदालत ने आरोपी नंदू को दोषमुक्त करते हुए बरी करने का आदेश जारी किया।
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