आगरा।
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सत्ता की कुर्सी हथियाने वालों के खिलाफ सीजेएम कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है।
ग्राम पंचायत खासपुर के प्रधान उदयवीर सिंह और उनकी पत्नी श्रीमती आरती के विरुद्ध धोखाधड़ी और जालसाजी के गंभीर आरोपों में थाना न्यू आगरा को मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया गया है।
क्या है पूरा मामलाबी?
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम ) माननीय मृत्युंजय श्रीवास्तव की अदालत में दयालबाग निवासी गुरुचरण सिंह ने अपने अधिवक्ता देव चौधरी के माध्यम से प्रार्थना पत्र दिया था।
आरोप है कि उदयवीर सिंह ने अपना मूल निवास छिपाकर और फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर ग्राम पंचायत खासपुर (ब्लॉक बिचपुरी) के गांव नगला तलफी का निवासी बनकर चुनाव लड़ा और अवैध रूप से प्रधान पद पर कब्जा किया।
दस्तावेजों में हेराफेरी का खुलासा:
वादी गुरुचरण सिंह ने अदालत के समक्ष विपक्षी के पुराने रिकॉर्ड पेश करते हुए सनसनीखेज खुलासे किए:
* 2006 का चुनाव: उदयवीर सिंह ने वार्ड संख्या 20 (लॉयर्स कॉलोनी) से चुनाव लड़ा था, जिसमें उसने खुद को नगला हवेली, दयालबाग का निवासी बताया था।

* 2012 का चुनाव: उदयवीर ने अपनी पत्नी आरती को वार्ड संख्या 65 (देव नगर) से पार्षद पद का चुनाव लड़वाया, जिसमें भी मूल निवास नगला हवेली ही दर्शाया गया था।
* 2015 का फर्जीवाड़ा: इसके बावजूद, उदयवीर ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर सितंबर 2015 में खुद को खासपुर का निवासी बताकर प्रधान पद का चुनाव लड़ा और निर्वाचित हुआ।
अदालत का कड़ा आदेश:
वादी के तर्कों और सबूतों को सुनने के बाद सीजेएम ने माना कि प्रथम दृष्टया यह धोखाधड़ी का मामला है। अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए:
* थानाध्यक्ष न्यू आगरा को तत्काल प्रभाव से मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए।
* मामले की निष्पक्ष विवेचना (Investigation) कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
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