आगरा।
करोड़ों रुपये के निवेश के बाद भी भुगतान न करने के मामले में आगरा की सीजेएम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय मृत्युंजय श्रीवास्तव ने सेबी (SEBI) प्रमुख और सहारा इंडिया के वारिसानों के खिलाफ अमानत में खयानत समेत अन्य धाराओं में परिवाद दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला ?
कमला नगर स्थित संगम विहार, यमुनोत्री कॉलोनी के निवासी प्रशांत गुप्ता और उनकी पत्नी बबली गुप्ता ने अपनी अधिवक्ता कामिनी जैन के माध्यम से अदालत में प्रार्थना पत्र दिया था।
आरोप है कि:
* सहारा इंडिया कंपनी (अलीगंज, लखनऊ) ने लुभावनी स्कीमों का लालच देकर दंपत्ति से करीब 8 से 10 लाख रुपये निवेश कराए।
* निवेश के समय वादा किया गया था कि मैच्योरिटी पर उन्हें बढ़ी हुई राशि के साथ भुगतान मिलेगा।
* मैच्योरिटी पूरी होने के बाद भी कंपनी ने भुगतान नहीं किया और उनकी मेहनत की कमाई हड़प ली।
धोखाधड़ी और भ्रमजाल का आरोप:
वादी के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि सेबी के अंतर्गत आने वाली इस कंपनी ने आम जनमानस को भ्रमजाल में फंसाकर करोड़ों रुपये एकत्र किए।
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जब भुगतान का समय आया, तो कंपनी और उसके जिम्मेदार अधिकारियों ने हाथ खड़े कर लिए।
इसे ‘अमानत में खयानत’ का स्पष्ट मामला बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी।
कोर्ट का आदेश:
प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए सीजेएम माननीय मृत्युंजय श्रीवास्तव ने मामले को परिवाद (Complaint Case) के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने इस मामले में अगली प्रक्रिया के तहत वादी के बयान दर्ज करने के लिए 9 फरवरी 2026 की तारीख नियत की है।
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