आगरा।
अदालत की कार्यवाही के लिखित रिकॉर्ड (ऑर्डर शीट) में हेरफेर कर वारंट जारी करने के एक गंभीर मामले में जिला सत्र न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है।
एडीजे-20 माननीय सत्यजीत पाठक ने अधीनस्थ न्यायालय द्वारा जारी वारंट के आदेश को निरस्त करते हुए मामले में पुनः सुनवाई के निर्देश दिए हैं।
मामला: तारीखों में हेराफेरी और काट-छाँट का आरोप:
जगदीशपुरा थाना क्षेत्र के बोदला निवासी नरेंद्र कुशवाहा और उनकी पत्नी भूरी देवी ने अपने अधिवक्ता राजकुमार कुशवाहा के माध्यम से सत्र न्यायालय में एक रिवीजन (पुनरीक्षण याचिका) दाखिल की थी।
याचिका में अधीनस्थ न्यायालय की कार्यप्रणाली पर निम्नलिखित आरोप लगाए गए:
* तारीख बदली गई: 28 मई 2025 को हुई सुनवाई के दौरान अगली तारीख 30 जुलाई 2025 तय की गई थी। अधिवक्ता ने इसी आधार पर ऑर्डर शीट पर हस्ताक्षर किए और अपनी डायरी में भी यही तारीख नोट की।
* अचानक हुआ बदलाव: बाद में कोर्ट की ऑर्डर शीट पर 30 जुलाई को काटकर उसे 30 जून 2025 कर दिया गया।
* पहले भी हुई छेड़छाड़: आरोप है कि इससे पूर्व भी 20 अप्रैल की तारीख तय कर पत्रावली (File) पर उसे काटकर 20 मार्च दर्ज कर दिया गया था।
* नुकसान पहुँचाने की नीयत: रिवीजन कर्ता का आरोप है कि उन्हें कानूनी हानि पहुँचाने और परेशान करने के उद्देश्य से बार-बार ऑर्डर शीट में काट-पीट की गई और तारीख से पहले ही उनके खिलाफ वारंट जारी करवा दिए गए।
सत्र न्यायालय का फैसला:
एडीजे माननीय सत्यजीत पाठक ने अधीनस्थ न्यायालय की पत्रावली का बारीकी से अवलोकन किया और अधिवक्ता राजकुमार कुशवाहा के तर्कों को न्यायसंगत माना।
अदालत ने पाया कि ऑर्डर शीट में की गई काट-छाँट के आधार पर वारंट जारी करना विधि सम्मत नहीं है।
कोर्ट का आदेश:
* अधीनस्थ न्यायालय द्वारा 30 जून 2025 को पारित वारंट के आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है।
* संबंधित न्यायालय को इस मामले में पुनः सुनवाई करने और नियमानुसार कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं।
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