आगरा।
अतिरिक्त न्यायालय संख्या 1 के पीठासीन अधिकारी माननीय राज बहादुर सिंह की अदालत ने मकान बेचने का सौदा कर 10 लाख रुपये हड़पने और बाद में बोगस चेक देने के मामले में अहम फैसला सुनाया है।
अदालत ने चेक बाउंस (डिशऑनर) के इस मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए एक वर्ष की कैद और 15 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
मामले के विवरण के अनुसार, वादी बाल किशन गुप्ता निवासी जंगजीत नगर, थाना सदर (आगरा) ने न्यायालय में परिवाद दायर किया था।
वादी का आरोप था कि जनवरी 2023 में आरोपी सुनील कुमार जैन पुत्र स्व. शंकर लाल जैन, निवासी जंगजीत नगर, फेस 2, थाना सदर ने अपना मकान 25 लाख रुपये में बेचने का सौदा उनके साथ तय किया था।
इस सौदे के तहत वादी ने आरोपी को 10 लाख रुपये की अग्रिम राशि का भुगतान कर दिया था और तय हुआ था कि शेष रकम बैनामे (रजिस्ट्री) के समय दी जाएगी।

वादी के अनुसार, 11 जुलाई 2023 को जब उसने आरोपी से बैनामा करने के लिए कहा, तो वह टालमटोल करने लगा। अधिक दबाव बनाने पर आरोपी ने यह कहते हुए मकान बेचने से इनकार कर दिया कि उसके घर में पारिवारिक कलह चल रही है।
इस पर वादी ने अपनी दी गई धनराशि वापस मांगी। रकम लौटाने के ऐवज में आरोपी ने वादी को 10 लाख रुपये का एक चेक थमा दिया, लेकिन जब वादी ने उसे भुगतान के लिए बैंक में लगाया तो वह डिशऑनर (बाउंस) हो गया।
न्यायालय में विचारण के दौरान वादी के अधिवक्ता राजेश यादव ने अपने तर्क प्रस्तुत किए और चेक बाउंस से संबंधित साक्ष्य अदालत के समक्ष रखे।
पीठासीन अधिकारी माननीय राज बहादुर सिंह ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने और वादी के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी सुनील कुमार जैन को इस मामले में पूर्ण रूप से दोषी पाया।
अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को एक साल की सजा और 15 लाख रुपये के जुर्माने से दंडित करने का आदेश पारित किया।
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