आगरा।
थाना हरी पर्वत क्षेत्र में मादक पदार्थ की बरामदगी के मामले में एक नया मोड़ आया है।
विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस एक्ट) माननीय विवेक कुमार की अदालत ने आरोपी द्वारा अपनी बेगुनाही के सबूत के तौर पर प्रस्तुत प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं।
अदालत ने होटल, टोल प्लाजा की सीसीटीवी फुटेज और आरोपियों की मोबाइल सीडीआर सुरक्षित कर विवेचना में शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
जानिये क्या है पूरा मामला ?
बीती 16 नवंबर 2025 की देर रात्रि थाना हरी पर्वत पुलिस ने एक अल्ट्रोज़ कार से मादक पदार्थ की तस्करी के आरोप में तीन युवकों—सुधांशु पाल, ऋतिक शर्मा और हर्षित यादव को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
बचाव पक्ष की दलील:
आरोपी सुधांशु पाल ने अपने अधिवक्ता रोहित अग्रवाल के माध्यम से अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर खुद को निर्दोष बताया।
अधिवक्ता ने तर्क दिया कि घटना के समय की सच्चाई सीसीटीवी और मोबाइल लोकेशन (CDR) से स्पष्ट हो सकती है।
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अदालत के कड़े निर्देश:
अदालत ने बचाव पक्ष के तर्कों को गंभीरता से लेते हुए निम्नलिखित आदेश पारित किए:
* सीसीटीवी फुटेज: रीतू होटल (NH-2, निकट बालाजी मंदिर, शिकोहाबाद) के मैनेजर और टोल प्लाजा टूंडला के मैनेजर को निर्देशित किया गया है कि वे 15 नवंबर 2025 की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखें।
* सीडीआर (CDR): तीनों आरोपियों (सुधांशु, ऋतिक और हर्षित) के मोबाइल फोन की 15 नवंबर से 17 नवंबर तक की कॉल डिटेल रिपोर्ट और लोकेशन सुरक्षित की जाए।
* विवेचना में शामिल: अदालत ने मामले के विवेचक (IO) को आदेश दिया कि वे इन सभी साक्ष्यों का संकलन करें और इन्हें अपनी जांच (विवेचना) का हिस्सा बनाएं।
इस आदेश के बाद अब पुलिस की विवेचना में इन तकनीकी साक्ष्यों की भूमिका अहम हो गई है, जिससे आरोपियों की लोकेशन और घटनाक्रम की सत्यता स्पष्ट हो सकेगी।
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