आगरा।
उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) द्वारा गिरफ्तारी को लेकर जारी दिशा-निर्देशों का पालन न करना पुलिस को भारी पड़ गया।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (संख्या-5) माननीय पंकज कुमार की अदालत ने हत्या के प्रयास और आयुध अधिनियम के आरोपी का न्यायिक रिमांड निरस्त कर दिया है।
अदालत ने न केवल आरोपी को 20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया, बल्कि लापरवाही बरतने पर विवेचक को ‘कारण बताओ’ नोटिस भी जारी किया है।
जानिये क्या था मामला ?
फतेहाबाद निवासी जानू गुप्ता ने थाना फतेहाबाद में शिकायत दर्ज कराई थी कि 18 जनवरी 2026 की रात वह बस स्टैंड के पास थे। वहां एक कार में कुछ युवक हुड़दंग कर रहे थे।
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कार में मोहल्ले की एक युवती को देख जब वादी ने विरोध किया, तो आरोपियों ने जान से मारने की नीयत से उन पर फायर झोंक दिया।
भीड़ ने मौके से आरोपी रोहित शर्मा (निवासी राजपुर चुंगी, सदर) को पिस्टल सहित पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था।
रिमांड निरस्त होने का आधार:
विवेचक ने आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजने हेतु अदालत में पेश किया था। सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ताओं— झम्मन सिंह और स्नेह पाण्डेय ने पुरजोर दलील दी कि पुलिस ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों (अर्ननेश कुमार बनाम बिहार राज्य आदि) का उल्लंघन किया है।
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अदालत का फैसला:
पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एसीजेएम पंकज कुमार ने पाया कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में अनिवार्य नियमों का पालन नहीं किया गया है।
कोर्ट ने आदेश दिया कि:
* आरोपी रोहित शर्मा का न्यायिक रिमांड स्वीकार नहीं किया जा सकता।
* आरोपी को 20 हजार रुपये के मुचलके पर तुरंत रिहा किया जाए।
* संबंधित विवेचक को नोटिस जारी कर पूछा जाए कि उन्होंने नियमों की अनदेखी क्यों की।
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