आगरा/नई दिल्ली ।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी सीआरपीएफ के एक पूर्व कांस्टेबल राजबीर को बड़ी राहत देते हुए सेवा से सेवानिवृत्त होने की तारीख से पहले की तिथि से इंस्पेक्टर पद का रैंक प्रदान करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता केवल अपने सम्मान की लड़ाई लड़ रहा है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ द्वारा राजबीर बनाम भारत संघ व अन्य के मामले में पारित किया गया. याचिकाकर्ता ने 27 जून 1983 को एक कांस्टेबल के रूप में सीआरपीएफ जॉइन की थी और 31 अगस्त 2017 को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी।
मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता 17 अगस्त 2017 को अन्य अधिकारियों के साथ इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नति पाने का हकदार था।
हालांकि, उसका सर्विस रिकॉर्ड पूरा न होने के कारण 22 सितंबर 2017 तक पदोन्नति का कोई आदेश पारित नहीं हो सका और इसी बीच उसने कार्यालय छोड़ दिया।

सुनवाई के दौरान उत्तरदाताओं के वकील ने इस बात से इंकार नहीं किया कि रिकॉर्ड की अनुपलब्धता के कारण याचिकाकर्ता का नाम सूची में शामिल नहीं हो पाया था, जबकि वह सेवानिवृत्ति से पहले ही पदोन्नति के योग्य था।याचिकाकर्ता को पहले ही काल्पनिक वरिष्ठता दी जा चुकी है।
याचिकाकर्ता के वकील के.के.शर्मा, मोहित शर्मा और अन्य ने अदालत को बताया कि वे किसी भी वित्तीय लाभ की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि केवल यह चाहते हैं कि उत्तरदाताओं को याचिकाकर्ता को इंस्पेक्टर का रैंक प्रदान करने का समारोह आयोजित करने का निर्देश दिया जाए।
न्यायालय ने परिस्थितियों को देखते हुए और याचिकाकर्ता राजबीर की बिना किसी वित्तीय परिणाम के केवल रैंक पाने की प्रार्थना को स्वीकार करते हुए उत्तरदाताओं को निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ता को 17 अगस्त 2017 से इंस्पेक्टर का रैंक प्रदान करें।
उच्च न्यायालय ने इस आदेश का पालन करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया है और इसी के साथ रिट याचिका का निपटारा कर दिया है।
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