आगरा।
नौ वर्षीया शिष्या से अश्लील हरकत करने, पाक्सो एक्ट और दलित उत्पीड़न के मामले में अदालत ने आरोपी शिक्षक को छह वर्ष की कैद और साढ़े सोलह हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट माननीय सोनिका चौधरी ने आरोपी के कृत्य पर तीखी टिप्पणी करते हुए अर्थदंड की पूरी राशि पीड़िता को देने और अतिरिक्त मुआवजे के लिए आदेश की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजने के निर्देश दिए हैं।
मामला आगरा जिले के बरहन थाना क्षेत्र का है। दर्ज मुकदमे के अनुसार, वादी की नौ वर्षीय बेटी और उसका आठ वर्षीय भाई भारती विद्या मंदिर कोचिंग में आरोपी शिक्षक ब्रजेश सिंह ठाकुर (निवासी नगला स्वरूप) से ट्यूशन पढ़ने जाते थे।
सात अप्रैल 2021 को भी दोनों बच्चे ट्यूशन पढ़ने गए थे। आरोपी कोचिंग के ऊपर बने कमरे में दोनों को पढ़ा रहा था। इसी दौरान उसने पीड़िता के भाई को रजिस्टर लेने के बहाने नीचे भेज दिया और पीड़िता का हाथ पकड़कर अश्लील हरकत करने का प्रयास किया।
जब पीड़िता ने डरकर मना किया, तो आरोपी ने बदनियती से उसे दबोच लिया। इसी बीच भाई के वापस आने पर आरोपी उसे पकड़ने के लिए भागा, जिसका फायदा उठाकर पीड़िता चीखती हुई कमरे से बाहर की ओर भागी।
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आरोपी ने करीब सौ मीटर तक दोनों भाई-बहन का पीछा भी किया। दो दिन तक ट्यूशन न जाने का कारण पूछने पर जब पीड़िता ने रोते हुए माता-पिता को आपबीती बताई, तो वादी आरोपी से शिकायत करने गया।
वहां आरोपी शिक्षक ने उलटे गाली-गलौज की और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए जान से मारने की धमकी दी।
अदालत की तीखी टिप्पणी:
न्यायालय के समक्ष वादी, पीड़िता और उसके भाई सहित कुल सात गवाह पेश किए गए।
विशेष न्यायाधीश माननीय सोनिका चौधरी ने अपने आदेश में कहा कि पीड़िता आरोपी की शिष्या थी।
आरोपी शिक्षक ने न सिर्फ लैंगिक हमला किया, बल्कि बच्ची को मानसिक और शारीरिक यंत्रणा भी पहुंचाई।
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अदालत ने सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सुभाष गिरी और विशेष लोक अभियोजक विजय किशन लवानियां के तर्कों को स्वीकार करते हुए कहा कि भारतीय समाज में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर माना गया है।
माता-पिता अपने बच्चों को इस विश्वास के साथ शिक्षक के पास भेजते हैं कि वे वहां पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे और अच्छे संस्कार पाएंगे। आरोपी ब्रजेश सिंह ठाकुर ने सामाजिक परंपराओं की मर्यादा को तार-तार किया है।
गुरु द्वारा किया गया ऐसा कृत्य समाज और माता-पिता के मन में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गहरा डर पैदा करता है।
अदालत ने इन टिप्पणियों के साथ आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा का ऐलान किया।
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