आगरा/नई दिल्ली ।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ‘द हिंदू’ अखबार के पत्रकार महेश लांगा को मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के एक मामले में अंतरिम ज़मानत दे दी है।
लांगा को पिछले साल गुजरात पुलिस ने गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स (GST) फ्रॉड से जुड़े आरोपों में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी केस दर्ज किया था।
चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया (CJI) माननीय सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने यह ज़मानत दी, लेकिन साथ ही लांगा पर उनके खिलाफ़ लगे आरोपों के बारे में कोई भी लेख या आर्टिकल लिखने पर रोक लगा दी।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य निर्देश:
* रोज़ाना ट्रायल: स्पेशल कोर्ट को मनी लॉन्ड्रिंग केस का ट्रायल रोज़ाना करने का आदेश दिया गया है, ताकि बचे हुए नौ गवाहों के बयान जल्द से जल्द रिकॉर्ड किए जा सकें।
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* ट्रायल में सहयोग: लांगा को ट्रायल में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया गया है और यह साफ़ किया गया कि वे अपनी रद्द करने की याचिका लंबित होने के आधार पर कोई रोक नहीं मांगेंगे।
* स्टेटस रिपोर्ट: कोर्ट ने ED को ऊपर बताई गई शर्तों के पालन पर एक स्टेटस रिपोर्ट देने का भी आदेश दिया है।
* अगली सुनवाई: मामले पर अगली सुनवाई 06 जनवरी, 2026 को तय की गई है।
कोर्ट में बहस:
लांगा की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने ज़मानत की मांग की, जबकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका कड़ा विरोध किया।
* ED का आरोप: मेहता ने आरोप लगाया कि लांगा, जो एक पत्रकार हैं, “पैसे वसूलते हुए पाए गए हैं” और धमकी देते थे कि ‘अगर पैसे नहीं दिए तो मैं कुछ छाप दूंगा’।
* सिब्बल की दलील: सिब्बल ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि यह चौंकाने वाला है कि उन पर गवाहों को प्रभावित करने का आरोप लगाया जा रहा है। उन्होंने ज़ोर दिया कि जिस मूल मामले के आधार पर PMLA केस बना है, उसमें कोई चार्जशीट भी दाखिल नहीं की गई है और वह अक्टूबर 2024 से जेल में हैं।
बेंच ने ट्रायल में केवल नौ गवाहों की पूछताछ बाकी होने को देखते हुए लांगा को अंतरिम ज़मानत दी।
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CJI माननीय सूर्यकांत ने लांगा को चेतावनी देते हुए कहा,
“उन्हें एक पत्रकार वगैरह के तौर पर अपने पद का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।”
सिब्बल ने कहा कि ज़मानत की शर्तों के किसी भी उल्लंघन पर बेल रद्द की जा सकती है।
इससे पहले, गुजरात हाई कोर्ट ने 31 जुलाई को लांगा को ज़मानत देने से मना कर दिया था।
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