आगरा:
बैंक खाते में ₹2 लाख की निकासी सीमा (withdrawal limit) होने के बावजूद ₹9.4 लाख अवैध रूप से ट्रांसफर होने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई ) को दोषी ठहराया है।
आयोग ने बैंक को निर्देश दिया है कि वह धोखाधड़ी से निकाली गई पूरी रकम ग्राहक को वापस करे।
क्या है पूरा मामला ?
दयालबाग की निवासी नीतू रंजन ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी कि 24 मार्च 2023 को उनके एसबीआई खाते से दो अलग-अलग लेनदेन में कुल ₹9.4 लाख निकाल लिए गए थे।
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पहला मैसेज सुबह 5:15 बजे ₹5 लाख और दूसरा ₹4.4 लाख ट्रांसफर होने का आया। चौंकाने वाली बात यह थी कि उनके खाते की दैनिक निकासी सीमा केवल ₹2 लाख थी।
जब नीतू रंजन ने बैंक के हीराबाग शाखा प्रबंधक से संपर्क किया, तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। प्रबंधक ने केवल एक शिकायत पत्र लेने और खाते का स्टेटमेंट देने तक ही सीमित रहे।
उन्होंने नेट बैंकिंग की जानकारी न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद भी बैंक की ओर से न तो पैसे वापस मिले और न ही कोई उचित कार्रवाई की गई।
उपभोक्ता आयोग का फैसला:
पीड़िता की शिकायत पर सुनवाई करते हुए, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव कुमार ने पाया कि बैंक अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा।
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आयोग ने आदेश दिया कि भारतीय स्टेट बैंक 45 दिनों के भीतर 9.4 लाख रुपये की पूरी रकम आयोग के खाते में जमा करे। इसके अतिरिक्त, मानसिक उत्पीड़न और कानूनी खर्च के लिए बैंक को ₹30,000/- अलग से देने होंगे।
यह फैसला बैंक की लापरवाही के खिलाफ ग्राहकों के अधिकारों की एक महत्वपूर्ण जीत है।
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