आगरा ।
हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ किसानों के अपमान और राष्ट्रद्रोह से जुड़ी शिकायत पर कल शुक्रवार को आगरा की स्पेशल कोर्ट (MP-MLA) में महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है।
न्यायाधीश माननीय अनुज कुमार सिंह की अदालत में दोनों पक्षों के बीच इस बात पर कानूनी बहस होगी कि क्या किसी मामले में आरोपी की जगह उनके अधिवक्ता के बयान दर्ज किए जा सकते हैं।
मामले की पृष्ठभूमि:
वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने कंगना रनौत के विरुद्ध कोर्ट में परिवाद दायर किया था। कोर्ट ने पूर्व में थाना न्यू आगरा को इस मामले की जांच कर आख्या (रिपोर्ट) प्रस्तुत करने के आदेश दिए थे। पुलिस ने 29 जनवरी 2026 को अपनी रिपोर्ट पेश की, लेकिन यहीं से कानूनी विवाद शुरू हुआ।
मुख्य विवाद: क्या वकील दे सकता है बयान ?
वादी पक्ष के अधिवक्ताओं सुखबीर सिंह चौहान और राजवीर सिंह ने पुलिस रिपोर्ट पर कड़ा विरोध जताया है।

उनका तर्क है कि:
* पुलिस ने कंगना रनौत के व्यक्तिगत बयान दर्ज करने के बजाय, उनकी सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता द्वारा दिए गए बयानों को रिपोर्ट का आधार बनाया है।
* वादी पक्ष का कहना है कि कोई भी अधिवक्ता अपने मुवक्किल की पैरवी तो कर सकता है, लेकिन मुवक्किल की जगह स्वयं बयान दर्ज नहीं करा सकता।
* दलील दी गई कि भविष्य में कंगना रनौत इन बयानों से यह कहकर मुकर सकती हैं कि ये उनके निजी बयान नहीं बल्कि वकील के विचार थे।
कोर्ट ने मांगी है ‘रूलिंग’:
पिछली सुनवाई (13 फरवरी) के दौरान कोर्ट ने वादी पक्ष से इस बिंदु पर विधिक रूलिंग (कानूनी नजीर) मांगी थी। कोर्ट यह जानना चाहता है कि क्या कानून में ऐसा कोई प्रावधान या उच्च न्यायालय/सुप्रीम कोर्ट का फैसला है जो स्पष्ट रूप से रोकता हो कि विपक्षी की ओर से उनके अधिवक्ता बयान दर्ज नहीं करा सकते।
कल की बहस इसी कानूनी बिंदु पर केंद्रित रहेगी कि पुलिस द्वारा पेश की गई आख्या को “अधूरी” मानकर खारिज किया जाए या उसे स्वीकार किया जाए।
यदि कोर्ट वादी पक्ष की दलीलों से सहमत होता है, तो कंगना रनौत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं और उन्हें व्यक्तिगत रूप से बयान दर्ज कराने के निर्देश दिए जा सकते हैं।
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