आगरा ।
आगरा के पुष्पांजलि हॉस्पिटल के डॉक्टर और प्रबंधक को चिकित्सा लापरवाही के एक मामले में न्यायालय से बड़ी राहत मिली है।
अपर जिला जज संख्या 19 माननीय लोकेश कुमार ने अधीनस्थ न्यायालय के उस फैसले को यथावत रखा है, जिसमें डॉक्टर और प्रबंधक के विरुद्ध दायर परिवाद को निरस्त कर दिया गया था। सत्र न्यायालय ने वादी द्वारा दायर रिवीजन याचिका को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया।
मामले के अनुसार, टेढ़ी बगिया निवासी उमेश कांत ने आरोप लगाया था कि 7 जून 2021 को उन्होंने अपने भाई शशि कांत उर्फ बॉबी को उपचार के लिए पुष्पांजलि हॉस्पिटल में भर्ती कराया था।
वादी का दावा था कि उनके भाई को सामान्य उल्टी-दस्त और शरीर पर लाल धब्बे की शिकायत थी, लेकिन अस्पताल में गलत इंजेक्शन और गर्दन के पास नली डालने की प्रक्रिया के कारण उनकी हालत बिगड़ गई।
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वादी ने यह भी आरोप लगाया कि उनसे दो दिन में दो लाख रुपये वसूलने के बाद उनके भाई को दिल्ली रेफर कर दिया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
वादी ने इस मामले में डॉक्टर अमित नारायण गुप्ता और अस्पताल प्रबंधक के विरुद्ध चिकित्सकीय लापरवाही और अन्य गंभीर आरोप लगाते हुए न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया था।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या 3 ने 6 मार्च 2025 को साक्ष्यों के अभाव में इस परिवाद को निरस्त कर दिया था। इस आदेश के विरुद्ध वादी ने सत्र न्यायालय में रिवीजन याचिका दायर की थी।
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सुनवाई के दौरान डॉक्टर और प्रबंधक की ओर से अधिवक्ता अशोक कुमार राठौर और सरकार की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता हेमंत दीक्षित ने दलीलें पेश कीं।
न्यायालय ने पाया कि मामले में डॉक्टर की लापरवाही सिद्ध करने के लिए किसी विशेषज्ञ चिकित्सक या मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट मौजूद नहीं थी।
इन तर्कों से सहमत होते हुए न्यायाधीश माननीय लोकेश कुमार ने रिवीजन याचिका खारिज कर दी और अधीनस्थ न्यायालय के आदेश को सही ठहराया।
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