आगरा:
कस्टम एक्ट, 1962 की धारा 135 के तहत आरोपित अशोक कुमार गुप्ता (निवासी न्यू आदर्श नगर, कमला नगर, आगरा) को घटना के 34 वर्ष बाद विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (SCJM) माननीय अचल प्रताप सिंह ने बरी करने का आदेश दिया है। आरोपी को यह राहत साक्ष्य के अभाव में मिली।
क्या था 34 साल पुराना मामला ?
यह मामला 23 फरवरी 1991 का है, जब कस्टम विभाग ने तस्करी के आरोप में चार लोगों को पकड़ा था।
* घटना: 23 फरवरी 1991 की सुबह 9:30 बजे, सहायक कलेक्टर सीमा शुल्क एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क के निर्देश पर, अधीक्षक आर. बी. गुप्ता के नेतृत्व में कस्टम विभाग की टीम ने शाहदरा चेक पोस्ट (टूंडला-आगरा हाईवे) पर निगरानी रखी।
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* पकड़ना: एक एम्बेसडर कार (संख्या UP 83, 9150) को रोकने का इशारा करने पर चालक ने कार भगा दी, जिसका पीछा कर अधिकारियों ने उसे रुकवा लिया। कार में चालक राहुल समेत कुल पाँच लोग सवार थे।
* बरामदगी: अधिकारियों द्वारा गहन व्यक्तिगत तलाशी के दौरान, पकड़े गए व्यक्तियों के गुप्तांगों से कंडोम में छिपाए गए दस-दस तोले के 27 सोने के बिस्कुट और 100-100 डॉलर के 10 नोट बरामद किए गए।
* आरोप पत्र: इस कार्रवाई के बाद, विभाग ने कस्टम एक्ट की धारा 135 के तहत अशोक कुमार गुप्ता सहित जितेंद्र कुमार जैन, श्याम कुमार और नरेंद्र कुमार के विरुद्ध अदालत में परिवाद पत्र प्रस्तुत किया।
विचारण और फैसला:
* अन्य आरोपियों की मृत्यु: विचारण (Trial) के दौरान अशोक कुमार गुप्ता के अतिरिक्त तीन अन्य आरोपियों (जितेंद्र कुमार जैन, श्याम कुमार, और नरेंद्र कुमार) की मृत्यु हो गई, जिसके बाद अदालत ने उनके विरुद्ध कार्रवाई समाप्त कर दी थी।
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* साक्ष्य का अभाव: आरोपी अशोक कुमार गुप्ता के विरुद्ध धारा 244 CrPC के तहत केवल एक गवाह, सुपरिंटेंडेंट लाला राम, को पेश किया गया। इसके बाद, परिवादी (यूनियन ऑफ इंडिया) द्वारा धारा 246 CrPC के तहत अनेक अवसर दिए जाने के बावजूद कोई अन्य गवाह पेश नहीं किया गया।
* बरी: आरोपी के वरिष्ठ अधिवक्ता निर्भय गुप्ता एवं विक्रांत गुप्ता द्वारा प्रस्तुत तर्कों को स्वीकार करते हुए, विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय अचल प्रताप सिंह ने साक्ष्य के अभाव को देखते हुए अशोक कुमार गुप्ता को घटना के 34 साल बाद बरी कर दिया।
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