आगरा/प्रयागराज।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जौनपुर के मुंगरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र में एक दरोगा द्वारा कथित तौर पर जमीन हथियाने और अवैध निर्माण कराने के मामले को गंभीरता से लिया है।
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने पुलिस अधीक्षक (SP) जौनपुर को दो सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण के साथ व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने या व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
मामले के मुख्य बिंदु:
याची नागेंद्र प्रसाद विश्वकर्मा व अन्य ने अधिवक्ता मनीष के माध्यम से याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि:
* बादशाहपुर थाने के उप-निरीक्षक (SI) वीरेंद्र यादव याची की कीमती जमीन को मात्र 2 लाख रुपये में बेचने का दबाव बना रहे हैं।
* आरोप है कि दरोगा ने याची का निर्माण ढहा दिया और विपक्षी गणों के साथ मिलकर 15-20 लोगों की मदद से जबरन निर्माण कराकर गेट और ताला लगवा दिया।
* याची के पास 3 फरवरी 2018 का वैध बैनामा होने के बावजूद पुलिस प्रशासन ने शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की।
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हाईकोर्ट के कड़े सवाल:
कोर्ट ने पुलिस के खिलाफ इन गंभीर आरोपों के सत्यापन के लिए SP जौनपुर से निम्नलिखित बिंदुओं पर जानकारी मांगी है:
* विवादित प्लॉट पर वर्तमान में किसका कब्जा है?
* क्या निर्माण ढहाने और दूसरे पक्ष को कब्जा दिलाने में दरोगा वीरेंद्र यादव की कोई भूमिका रही है?
* याचिका में प्रस्तुत फोटो में दिख रहा निर्माण याची की जमीन पर है या उसके बगल की जमीन पर ?
विपक्ष और पुलिस का तर्क:
सरकारी पक्ष की ओर से उप-निरीक्षक सुरेंद्र प्रताप तिवारी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि यह दो पक्षों के बीच जमीन का विवाद है और पुलिस ने धारा 170 के तहत निरोधात्मक कार्रवाई की है। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब पुलिस अधिकारी पर ही सीधे गंभीर आरोप हों, तो उसका सत्यापन किया जाना अनिवार्य है।
अगली सुनवाई: मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी, जिसमें SP जौनपुर के हलफनामे के आधार पर आगे की कार्यवाही तय की जाएगी।
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